Monday, June 15, 2009

वैज्ञानिक ढंग से सोचें और फिर राय रखें

आपको याद होगा 1987 में राजस्थान के सीकर स्थित दिवराला गांव में रूप कंवर सती कांड हुआ था। इस घटना को मीडिया ने इतनी ज्यादा तवज्जो दी कि अमेरिका सहित विदेशों में भी यह घटना सुर्खियों में रही। इसके बाद घरेलू और विदेशी मीडिया में इस पर बहस शुरू हुई और इस पर अलग-अलग विचार सामने आए। हालांकि बहुमत तो फिर भी इस पक्ष में था कि आधुनिक समाज में इस तरह की घटनाओं के लिए कोई जगह नहीं है। आप भी सोचिए। इंसान की किसी राय के पीछे एक कारक नहीं होता। वह जिस सांस्कृतिक, धाार्मिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि से आता है उसकी राय और विचारों पर उसका पूरा असर होता है। हो सकता है कि एक राजपूत युवक इस घटना को ऐतिहासिक नजरिए से देखे और कहे कि ऐसा तो राजपूतों में हमेशा होता आया है। मृत्यु एक सच्चाई है, लेकिन फिर भी किसी प्रिय के जाने पर व्यक्ति यही कहता है कि मुझे छोड़ दो मुझे भी मरना है मैं जीकर क्या करूंगा, लेकिन क्या ऐसे में सच में कोई उसे आग या कुएं में कूद जाने देता है। नहीं ना, तो कोई महिला भी यह बात कह दे कि पति के बिना मैं क्या करूंगी मुझे मरना है, तो इसे आप ये कैसे समझ सकते हैं कि वह दैवीय शक्ति से संचालित है और सती होना चाहती है। राजस्थान में आज भी सती के देवस्थान और मंदिर मिल जाएंगे और उनको मानने वाले श्रद्धालुओं की संख्या भी बड़ी भारी है, लेकिन कई सौ वर्र्षों पहले की घटनाओं को आज के परिप्रेक्ष्य में नहीं देखा जा सकता। आज हम वैज्ञानिक दृष्टिïकोण अपनाकर आगे बढ़ रहे हैं। हर घटना पर प्रतिक्रिया देने से पहले उस पर वैज्ञानिक दृष्टिïकोण से सोचें और फिर राय रखें देखिए न जाने कितनी बुराइयां समाज के बीच से कैसे गायब होती हैं।

1 comment:

गजेन्द्र सिंह भाटी (बीकानेर) said...

Well Ratan sa ...Beside this I would like to here the ones who have their own logic to jusitify 'sati'.

Without listening to them we can not get to bottem of How to treat the sati monuments we have today in our society before us.

We don't allow sati now but what about the devotion people have today for the x-satis and their temples.

Let's here what the people of that time has to say about it.

let them say.

Gajendra Singh Bhati