Tuesday, November 10, 2009

'बेहतर कल के लिएÓ सबकुछ अनदेखा न करें

हाल ही में जयपुर जाते समय देखा कि राष्टï्रीय राजमार्ग संख्या 8 के किनारे बोर्ड लगे हुए थे जिन पर लिखा था 'कार्य प्रगति पर है-बेहतर कल के लिएÓ। वहां पर कई ट्रक खड़े थे जिनमें सड़क किनारे से पेड़ों को काटकर लादा जा रहा था। पूरी जानकारी हासिल करने पर पता चला कि एनएच 8 को छह लेन का किया जा रहा है। ऐसे में बीच में आने वाले लाखों पेड़ों की 'बलिÓ दी जानी शुरू की जा चुकी थी। राजमार्ग संख्या 8 देश के व्यस्ततम राजमार्र्गों में से एक है क्योंकि यह राष्टï्रीय राजधानी दिल्ली को आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ता है। सवाल यह है कि तेज आर्थिक विकास के लिए ढांचागत विकास में किस स्तर तक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया जाए। आबादी के बढ़ते बोझ और परिवहन की बढ़ती जरूरत से वाहनों की संख्या बेकाबू हो रही है। ऐसे में सड़कों को चौड़ा करना आज की मजबूरी है। लेकिन बेहतर कल के लिए जंगलों को साफ करना खतरनाक साबित हो सकता है। इस बात को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है कि काटे गए पेड़ों के स्थान पर कितने नए पेड़ लगाए गए। प्रकृति अपने साथ कितना खिलवाड़ झेलेगी। मानवीय प्रहार से गुस्साई प्रकृति कई बार अपना रौद्र रूप दिखा चुकी है। तेज विकास के लिए प्राकृतिक संसाधनों और प्रकृति का अंधाधुंध दोहन कर जिस तरह नुकसान पहुंचाया गया है, उसके परिणाम पहले ही सामने आने लगे हैं। देश में वन्य क्षेत्र पहले ही अनुपात से काफी कम है। ऐसे में विकास कार्र्यों के दौरान पेड़ों की होने वाली कटाई की भरपाई के ठोस उपाय बहुत जरूरी हैं। इसके अलावा गैर-कानूनी रूप से होने वाली पेड़ों की कटाई पर भी लगाम लगानी होगी। इसको गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है क्योंकि यह पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए काफी जरूरी है। पेड़ों की कटाई तो केवल एक उदाहरण भर है तेज औद्योगीकरण और ढांचागत विकास के चलते पर्यावरण की कई रूपों में अनदेखी की जा रही है।