Wednesday, February 24, 2010

जानें पीपीएफ अकाउंट के क्या हैं फायदे और कैसे खुलवाएं खाता

पीपीएफ यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड अकाउंट के बारे में बहुत सारे लोगों को पूरी जानकारी नहीं होती है। यकीन मानिए इसके बहुत सारे फायदे हैें और हर वर्ग के लिए यह उपयुक्त है। यह खाता स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चुनिंदा शाखाओं और पोस्ट ऑफिसों में खुलवाया जा सकता है। यह कम से कम 15 साल के लिए खोला जा सकता है और पांच साल के लिए समय सीमा बढ़ाई जा सकती है। हां यह ध्यान रखने की बात है कि इस खाते को मृत्यु के अलावा अन्य किसी स्थिति में समय से पहले बंद नहीं किया जा सकता। इसमें सालाना न्यूनतम 500 रुपये और अधिकतम 75 हजार रुपये जमा किए जा सकते हैं। इसमें जमा पर 8.50 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है। खास बात यह है कि इसमें की गई सालाना जमा पर आपको आयकर में छूट भी मिल सकती है। यानी यदि कोई युवा इस खाते में 25 साल की उम्र में 1,000 रुपये मासिक जमा करे तो एक बड़ी रकम उसके पास 45 की उम्र में होगी, जिसका इस्तेमाल वह अपने बच्चों की पढ़ाई या अपने बुढ़ापे के लिए निवेश में कर सकता है।
पीपीएफ खाते के तमाम फायदों के बावजूद कई लोग पीपीएफ अकाउंट नहीं खुलवा पाते हैं। दरअसल ऐसे लोग हर चीज को टालने के आदी होते हैं। वे इस खाते को खोलने के बारे में सोचते तो हैं, पर ऐसा कर नहीं पाते हैं। ज्यादातर लोग अपना खाता भारतीय स्टेट बैंक में खोलना चाहते हैं। उनका भरोसा है इस बैंक पर। पर इसके बाद भी देखा गया है कि वे सिर्फ सोचते ही रह जाते हैं। हकीकत में पीपीएफ अकाउंट खोलना कोई मुश्किल काम नहीं है। अगर आप इस खाते को खोलना चाहते हैं, तो हम 4 साधारण से स्टेप आपको सुझा रहे हैं। आप इनका पालन करके बमुश्किल 30 से 35 मिनट में स्टेट बैंक में अपना खाता खुलवा सकते हैं। पर इसके लिए आपको कुछ तैयारी पहले से करनी होगी।पहला कदम : ब्रांच का चुनाव करेंपीपीएफ अकाउंट खोलने के लिए सरकार ने कुछ ब्रांच अधिकृत किए हैं। आपको सबसे पहले ऐसी ब्रांच के बारे में पता करना होगा। आमतौर पर एसबीआई की जो बड़ी शाखाएं हैं और जहां ग्राहकों की तादाद ज्यादा रहती है, वहां इस खाते को खोलने की सुविधा उपलब्ध है। यहां एक बात और याद रखें पीपीएफ अकाउंट खुलवाने के लिए उस बैंक में बचत खाता होना जरूरी नहीं है।दूसरा कदम : प्रक्रिया पूरी करेंएक बार जब आप बैंक का सेलेक्शन कर लेगें, तो इसके बाद आपका काम काफी आसान हो जाता है। दूसरे कदम के तौर पर आपको बैंक से अकाउंट खोलने वाला फार्म लेकर भरना होगा। इसमें बमुश्किल 5 मिनट का समय लगता है। फार्म में आपको एक नॉमिनी का नाम देना होगा। साथ ही किसी गवाह के दस्तखत होंगे। इस फॉर्म के साथ आपको अपना पहचान और निवास का सर्टिफिकेट लगाना होता है। इसके लिए आप पासपोर्ट, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी या राशन कार्ड आदि का इस्तेमाल कर सकते हैं। फार्म में 2 पासपोर्ट साइज फोटो भी लगाने होते हैं। जब खाता खुलवाने जाएं, तो इन प्रमाण पत्र की फोटो कापी भी साथ ले जाएं। अगर किसी वेरीफिकेशन की जरूरत होगी, तो वो मौके पर ही हो जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में 20 मिनट से ज्यादा का वक्त नहीं लगता है।तीसरा कदम : पास बुक हासिल करेंआप जितनी भी रकम का खाता खुलवाएंगे, उसे पहले एक स्लिप में भरकर देना होगा। पर इसके बाद बैंक आपको एक पासबुक बनाकर दे देगा। पासबुक बचत खाते की ही तरह होती है। इसमें आपकी फोटो लगी रहेगी। साथ ही नॉमिनी का नाम दर्ज होगा। इस पासबुक के पीछे पीपीएफ खाते के नियमों का जिक्ररहता है।चौथा कदम : ऑनलाइन कराएंअगर आपके पास पहले से एसबीआई का कोई खाता है, तो पीपीएफ अकाउंट को इससे लिंक करा लें। ऐसा कराने से आपको जब भी पीपीएफ खाते में पैसे जमा करने होंगे, ब्रांच में नहीं जाना पड़ेगा। इससे आपके समय की बचत होती रहेगी। आपको शाखा में जाकर लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।कुछ और ध्यान रखेंकई बार लोग पीपीएफ के खाते को एक बैंक से दूसरे में ट्रांसफर कराना चाहते हैं। इसे शिफ्ट नहीं करा पाते हैं। इसके लिए आप अपनी पीपीएफ पासबुक के साथ नई ब्रांच में जाएं, और वहां एक अप्लीकेशन लिखकर दे। पासबुक को उसके साथ पेश करें। इस प्रक्रिया में 15 से 20 मिनट का समय लगता है। अगर आप पीपीएफ अकाउंट के निवेश पर टैक्स छूट पाना चाहते हैं, तो पासबुक की फोटो कापी करा लें। इसके बाद संबंधित बैंक से इसे अटेस्टेड करा लें। साथ ही पीपीएफ खाते में पैसा हर महीने के 5 तारीख से पहले निवेश करने की योजना बनाएं। इससे उस महीने का ब्याज जुड़ जाता है।

पढ़ाई के लिए कैसे लें लोन

एजुकेशन लोन के लिए आपको किसी भी निजी या पब्लिक सेक्टर के बैंक से संपर्क करना होगा। पर इससे भी पहले आप जिस संस्थान से पढ़ाई कर रहे हैं उसी से ही संपर्क करें। हो सकता है कि आपके संस्थान ने कुछ बैंकों से समझौते कर रखे हों। बैंक आपके संस्थान की रेपुटेशन के मुताबिक ही लोन उपलब्ध कराएगा। ज्यादातर बैंक कोर्स के मुताबिक लोन देते हैं। आपका पूरे कोर्स पर कितना खर्च होगा, उसी के अनुसार लोन मंजूर किया जाता है। आमतौर पर एजुकेशन लोन 5 से 7 साल की अवधि के लिए दिया जाता है। पर खास हालात में इस अवधि को बढ़ाकर 10 साल भी किया जा सकता है।आमतौर पर 4 लाख तक के एजुकेशन लोन पर किसी तरह की सिक्युरिटी की जरूरत नहीं होती है। कुछ निजी बैंक 7.5 लाख तक के लोन बिना किसी सिक्युरिटी के दे देते हैं। पर ये पूरी तरह छात्र के प्रोफाइल पर निर्भर करता है। बैंक ये देखते हैं कि आपकी या आपके परिजनों की लोन चुकाने की क्षमता कैसी है। कभी-कभी सिक्युुरिटी की जरूरत पड़ती है कभी नहीं। बेहतर रास्ता यही है कि आप अपनी स्थिति के मुताबिक बैंक अधिकारियों से बात करें।

नए वित्त वर्ष में एफडी से मिल सकता है बेहतर रिटर्न

यदि आपके पास अतिरि€त पूंजी है तो आपके लिए एक अ‘छी खबर है। बैंकों की फि€स्ड डिपॉजिट (एफडी) दरें बढऩे जा रही हैं। यदि सब ठीक-ठाक रहा तो अप्रैल से शुरू होने वाले वि?ा वर्ष 2010-11 में सभी बैंक एफडी पर मिलने वाले ?याज की दरों में बढ़ोतरी कर देंगे। यानी आपको एफडी में निवेश पर पहले से बेहतर रिटर्न मिल सकेगा। एचडीएफसी बैंक ने 19 फरवरी को एफडी की विभि‹न स्कीमों के लिए ?याज दरों में 0.25 से 1.5 फीसदी तक की बढ़ोतरी की थी। अ‹य बैंक भी दरों में बढ़ोतरी की योजना बना रहे हैं। सार्वजनिक क्षेल्œा का बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के भी सप्ताहभर में फि€स्ड डिपॉजिट पर ब्याज दरें बढ़ा सकता है। आईडीबीआई और आईसीआईसीआई बैंक भी इस महीने की शुरुआत में एफडी की कुछ स्कीमों में ब्याज दर 0.25 से 0.50 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर चुके हैं। जेएंडके बैंक ने एक साल से स€™यादा की एफडी पर ?याज दर में 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी की है। विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रतिस्पर्Šाा में कई अ‹य बड़े बैंक भी जल्द ही कूदने वाले हैं। 22 फरवरी को अपनी रिपोर्ट में क्रेडिट सुइस ने कहा था कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और आईसीआईसीआई की एफडी दरें आŠाा से एक फीसदी के डिस्काउंट पर उपल?Šा हैं और ये दोनों भी दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। हालांकि बड़े बैंकर्स ने इससे असहमति जताई है। उनके मुताबिक बैंक संभवत: मई-जून तक एफडी दरों में बढ़ोतरी नहीं करेंगे, €योंकि बैंकों के पास लोन के रूप में देने के लिए पर्याप्त लि€िवडिटी मौजूद है। इसके विपरीत क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का मानना है कि लोन की वृद्धि दर बढ़ रही है। फिलहाल यह 14.8 फीसदी है और आगे भी इसमें तेजी की संभावना है। आरबीआई भी मौद्रिक नीति को सख्त करने जा रहा है। ऐसे में बैंकों के पास दिख रही लि€िवडिटी स€™यादा समय तक नहीं रह सकेगी और एफडी को आकर्षित करने के लिए वे डिपोजिट पर ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। बैंकों में डिपोजिट की रफ्तार हाल ही में गिरकर 17 फीसदी पर पहुंच गई थी जो चार साल में सबसे कम है। ऐसे में यदि जमा दरों में बढ़ोतरी होती है तो एफडी की ओर भी लोगों का रुझान बढ़ेगा।

Tuesday, February 23, 2010

अप्रैल से सेङ्क्षवग अकाउंट देगा सोने का अंडा!

अगर आप उन लोगों में से हैं जिनके सेविंग अकाउंट में हमेशा काफी पूंजी जमा रहती है तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है। एक अप्रैल से आपको सेविंग अकाउंट में जमा आपकी पूंजी पर अब ब्याज की रकम ज्यादा मिलेगी। रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले साल घोषणा की थी कि सेविंग अकाउंट में जमा पर मिलने वाले ब्याज की गणना की पद्धति में बदलाव किया जाएगा। यह बदलाव एक अप्रैल 2010 से प्रभावी होना है। नई पद्धति में सेविंग अकाउंट पर ब्याज दर तो 3.5 फीसदी ही रहेगी, लेकिन ब्याज की गणना प्रतिदिन के हिसाब से होगी। फिलहाल कैसे होती है ब्याज की गणनाफिलहाल आपके सेविंग अकाउंट में 10 तारीख से लेकर महीने के आखिर तक जो भी न्यूनतम राशि रहती है उसी पर बैंक ब्याज देता है। ब्याज दर 3.5 फीसदी सालाना या 0.29 फीसदी मासिक होती है। बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनके अकाउंट में महीने के आखिर में खाते में काफी कम रकम बाकी रहती है। इससे खाताधारकों को काफी नुकसान उठाना पड़ता है। मान लीजिए आपके सेविंग अकाउंट में 10 नवंबर को 1,000 रुपये हैं और एक दिन बाद आप खाते में एक लाख रुपये जमा कर देते हैं। लेकिन 30 दिसंबर को आप ये एक लाख रुपये निकाल लेते हैं तो आपके इन 51 दिनों के लिए केवल 1,000 रुपये पर ही ब्याज मिलेगा। क्योंकि 10 नवंबर से 30 नवंबर के दौरान आपके खाते में न्यूनतम राशि 1,000 रुपये ही शेष थी और उसके बाद 10 दिसंबर से 31 दिसंबर के दौरान भी न्यूनतम राशि 1,000 रुपये ही रह गई। जबकि इस दौरान एक लाख एक हजार रुपये बैंक के पास 49 दिन के लिए मौजूद रहे। इस नियम से बैंक फायदे में रहते हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि ज्यादातर लोग महीने के खर्च के लिए बचत खाते से 10 तारीख के पहले ही रकम निकाल लेते हैं। रिजर्व बैंक ने एक अप्रैल से नया नियम लागू करने की घोषणा कर आम खाताधारकों को काफी राहत दी है। इस नियम की घोषणा 21 अप्रैल 2009 को चालू वित्त वर्ष 2009-10 की सालाना मौद्रिक नीति पेश करते हुए रिजर्व बैंक के गवर्नर डॉ. डी सुब्बाराव ने की थी। अप्रैल के बाद कितना मिलेगा ब्याजहालांकि एक अपै्रल के बाद भी सेविंग अकाउंट पर सालाना ब्याज दर 3.5 फीसदी ही रहेगी, लेकिन ब्याज दर की गणना बदल जाएगी। तब ब्याज दर 3.5 फीसदी सालाना या 0.0095 फीसदी प्रति दिन होगी। सबसे जरूरी बात तो यह कि आपके अकाउंट के प्रतिदिन के बैलेंस पर ब्याज की गणना होगी। मानिए अप्रैल महीने की आपके सेविंग अकाउंट की स्टेटमेंट नीचे दिए गए विवरण जैसी है-तारीख जमा (रुपये) निकासी बकाया1 अप्रैल 5,0002 अप्रैल 30,000 35,0003 अपै्रल 4,000 31,0005 अप्रैल 4,000 27,00010 अप्रैल 12,000 15,00013 अपैैल 2,700 17,70018 अप्रैल 4,500 13,20025 अप्रैल 5,500 7,70030 अप्रैल 7,700ऐसे में ब्याज की मौजूदा गणना पद्धति के तहत आपको 10 अपै्रल से 30 अप्रैल तक आपके सेविंग अकाउंट में न्यूनतम बकाया यानी 7,700 रुपये पर 0.29 फीसदी मासिक की दर से अप्रैल में 22.46 रुपये ब्याज मिलता। लेकिन एक अप्रैैल से नई पद्धति लागू होने के बाद अप्र्रैल का आपके सेविंग अकाउंट की राशि का ब्याज 0.0095 फीसदी प्रतिदिन के हिसाब से 48.82 रुपये होगा। इससे साफ है कि आपको अप्रैल के बाद अपने सेविंग अकाउंट पर दोगुना से भी ज्यादा ब्याज मिलने जा रहा है। हालांकि इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आप अपनी बचत को सेविंग अकाउंट में डाले रखें। अपने पैसे को अन्य स्थानों पर निवेश कर इससे काफी ज्यादा रिटर्न आप हासिल कर सकते हैं।

Monday, February 22, 2010

रिटायरमेंट के बाद एफडी अच्छा विकल्प नहीं

बहुत सारे लोग समय से पहले रिटायरमेंट के बारे में सोचते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि रिटायरमेंट के बाद नियमित आय कैसे प्राप्त करें ताकि घर का खर्च आसानी से चलता रहे। परंपरागत रूप से सोच यही होती है कि फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) में निवेश किया जाए और उससे मिलने वाली ब्याज की रकम से अपना घर खर्च चलाया जाए। लेकिन क्या यह सही विकल्प है? क्या आप जीवन भर एफडी से मिलने वाली ब्याज की रकम से गुजारा कर सकते हैं? इस लेख में यही बताया गया है कि टर्म/फिक्स्ड डिपॉजिट जल्दी रिटायर होने वाले किसी व्यक्ति के लिए सबसे अच्छा विकल्प नहीं हो सकता। ऐसा इसलिए क्योंकि जब आप नौकरी कर रहे होते हैं तो हर महीने आपकी आय काफी ज्यादा होती है जिसका इस्तेमाल आप अपने नियमित खर्चों को पूरा करने के लिए करते हैं। गैर नियमित खर्च जैसे फ्रिज आदि खरीदने के लिए आप जमा पूंजी का इस्तेमाल करते हैं। जब आप रिटायर होते हैं तो खर्च थोड़ा बहुत कम ज्यादा होकर करीब उतना ही बना रहता है, लेकिन आय पहले के मुकाबले काफी घट जाती है। ऐसे में एफडी के ब्याज से आप खर्च कैसे चला सकते हैं? इसलिए आय का ऐसा स्रोत बनाने की जरूरत है आपके खर्च पूरे कर सके और जीवनभर आपको निश्चित आय मिल सके। परंपरागत नजरिया: सावधि जमा (एफडी)भारतीय लोगों की परंपरागत सोच यही है कि रिटायरमेंट के बाद पूंजी को एफडी जैसे नियमित आय वाले इंस्ट्रूमेंट्स में लगाना चाहिए। लेकिन जो व्यक्ति समय से पहले रिटायरमेंट लेना चाहता है उसके लिए क्या एफडी सही विकल्प है। इसे एक विश्लेषण के जरिए समझते हैं। कितने तरह की एफडीटर्म या फिक्स्ड डिपॉजिट में आप एक निश्चित रकम निश्चित समय के लिए बैंक में जमा कराते हैं। बदले में बैंक आपको ब्याज के रूप में तय राशि एकमुश्त या मासिक, तिमाही या सालाना आधार पर देता है। फिक्स्ड डिपॉजिट की समय सीमा समाप्त होने पर बैंक आपको वह पूरी रकम लौटा देता है जो आपने जमा की थी।रिटायर्ड व्यक्ति के लिए एफडी का मतलबयदि आप 60 साल की उम्र में २५ लाख रुपये लेकर रिटायर होते हैं। यदि यह मान लें कि फिक्स्ड डिपॉजिट पर बैंक 10 फीसदी की दर से ब्याज देता है। ध्यान रहे यह दर अधिकतम ही होगी और पूरे समय तक यह हासिल करना मुश्किल है। मान लें आपको औसत 8 फीसदी ब्याज एफडी पर मिलेगा तो 25 लाख रुपये की एफडी से आपको सालाना दो लाख रुपये, यानी 16,667 रुपये हर महीने मिलते रहेंगे। क्या यह रकम रिटायरमेंट के बाद आपके परिवार का खर्च चलाने के लिए पर्याप्त है। यह भी हो सकता है कि आप अपने रिटायमेंट के लिए पर्याप्त रकम नहीं बचा पाए हों। यदि आपके परिवार का मासिक खर्च 15,000 रुपये है तो यह आय पर्याप्त है। लेकिन यदि यह आय फिलहाल के लिए पर्याप्त भी है तो क्या यह राशि आपके परिवार को आपके जीवन के बचे समय में पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा मुहैया करा पाएगी? महंगाई (मुद्रास्फीति) का असरइस बात को दिमाग में रखें कि सभी जरूरी वस्तुओं और सेवाओं के दाम हर साल तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में आपका मासिक खर्च भी हर साल बढ़ता चला जाएगा। क्या आपकी एफडी से होने वाली आय महंगाई से सुरक्षा दे पाएगी। आय और खर्च के बीच का यह दायरा हर साल बढ़ता ही चला जाएगा। ऐेसे में आपके पास क्या विकल्प हैं? यदि आप एफडी में ही निवेश करना चाहते हैं तो दो काम कर सकते हैं।1. ज्यादा मासिक आय का करें इंतजाम आपको रिटायरमेंट के लिए ज्यादा बचत करनी चाहिए, ताकि एफडी पर ब्याज से मिलने वाली रकम आपके परिवार के खर्च के लिए पर्याप्त हो। उदाहरण के लिए यदि आप 60 की उम्र में रिटायर होते हैं और आपका मासिक खर्च 15,000 रुपये है। लेकिन खर्च में आए दिन बढ़ोतरी होती रहती है। मानिए आप 90 साल की उम्र तक जिंदा रहेेंगे। तब आपका मासिक खर्च 81,276 रुपये मासिक या 9,75,310 रुपये सालाना हो सकता है। ऐसे में 8 फीसदी ब्याज दर से यह राशि हासिल करने के लिए आपको करीब 1.22 करोड़ रुपये एफडी में निवेश की जरूरत होगी। 2. खख्र्च पूरा करने के लिए एफडी से रकम निकालेंदूसरा विकल्प यह हो सकता है कि आप अपनी जमा राशि में से हर साल थोड़ी-थोड़ी रकम निकालते रहें जो कम पडऩे वाले खर्च की भरपाई कर सके। इसे भी उदाहरण से समझते हैं। माना 25 लाख रुपये की एफडी पर 8 फीसदी ब्याज दर से मिलन वाली आय से आप तीन साल ही अपना खर्च चला पाते हैं। उसके बाद खर्च बढऩे पर अतिरिक्त खर्च को पूरा करने के लिए आप एफडी से कुछ रकम निकाल लेते हैं। ऐसा करने पर आपको एफडी से मिलने वाली रकम भी हर साल घटती चली जाएगी। ऐसे में एक समय आपके पास मूल रकम भी नहीं बचेगी और आप पूरा कोष खर्च कर चुके होंगे। उदाहरण के लिए यदि 18 साल में ऐसा होता है तो 78 की उम्र में आप अपनी रिटायरमेंट की पूरी रकम खर्च कर चुके होंगे। निष्कर्ष यह है कि दोनों ही तरीकों में एफडी से मिलने वाली रकम से आप अपनी रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी आसानी से नहीं बिता सकते। एफडी पर लागू होने वाली बात पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम, प्रोविडेंट फंड (पीएफ), पीपीएफ, सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम, नेशनल सेविंग्स स्कीम, किसान विकास पत्र, भविष्य निर्माण बांड आदि पर भी लागू होती है।

देश में एसएमई के लिए भरपूर अवसर

देश में एक करोड़ 36 लाख से च्यादा छोटे और मझोले उद्योग धंधे चल रहे हैं। इस वर्ष इनका कारोबार तकरीबन 4.7 लाख करोड़ रुपये का रहा। देश के कुल घरेलू उत्पाद में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से तकरीबन 70 फीसदी हिस्सेदारी इन्हीं मझोले और छोटे उद्योग धंधों की होती है। इसका सीधा सा मतलब है कि देश की अर्थव्यवस्था में इनकी जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। देश में एसएमई के लिए अभी बहुत गुंजाइश बाकी है। हालांकि इसी के साथ इन मझोले धंधों को आगे बढऩे के लिए पैसे की भी उतनी ही जरूरत है। जहां बढ़े उद्यमियों को पैसा मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ता है वहां बाजार से पैसा उठाना एसएमई के लिए आसान काम नहीं है। जब हालात खराब चल रहे हों तो उद्योग चलाने के लिए सबसे अहम चीज पैसे के लिए मझोले उद्यमियों को खासी दिक्कत झेलनी पड़ती है। विशेषज्ञों के मुताबिक सबसे च्यादा पेरशानी तब होती है जब उन्हें कर्ज लेने के लिए बैंक के अलावा दूसरे विकल्पों की जानकारी नहीं होती है। एसएमई रेटिंग एजेंसी ऑफ इंडिया के प्रमुख शशांक जैन ने बताया कि उद्योग चलाने के लिए बैंक लोन के अलावा उद्यमी प्राइवेट इक्विटी (पीई) और कैपिटल वेंचर से भी फंड ले सकता है। इसके साथ ही छोटे और मझोले उद्यमी लघु उद्योग मंत्रालय द्वारा चलाई जा रही कई योजनाओं के तहत अपने उद्योग को बनाए रखने के लिए फंड ले सकते हैं। जैन ने बताया कि सिडबी भी छोटे और मझोले उद्यमियों को फंड मुहैया कराता है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार और सिडबी क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर माइक्रो एंड स्मॉल एंटरप्रन्योर (सीजीटीएमएसई) योजना के तहत ऐसी छोटी कंपनियों को वित्तीय मदद करती हैं। सीजीटीएमएसई योजना के तहत कोई भी छोटी कंपनी इसके सदस्य वित्तीय संस्था से 50 लाख रुपये तक उधार ले सकती है। च्यादातर एसएमई पैसे के लिए बैंकों से कर्ज लेना फैसला करते हैं। जैसे ही एसएमई बैंक से कर्ज लेते हैं वे मुख्य सेक्टर लेंडिंग के दायरे में आ जाते हैं। पिछले महीने गोल्डमैन सेस की जारी रिपोर्ट में कहा गया था कि बैंकों के कुल नॉन पर्फार्मिंग एसेट वर्ष 2007 में 3 फीसदी थे। इनके वर्ष 2010 तक बढ़कर 4.5-5 फीसदी होने की आशंका है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि इसके लिए कॉर्पोरेट और एसएमई क्षेत्र ही जिम्मेदार होंगे। छोटे और मझोले उद्यमियों का भी मानना है कि इस समय हालात खस्ता चल रहे हैं। चेन्नई की एक फर्म टेक्नोप्लस सर्विसेज के प्रबंध निदेशक एनए रघु का कहना है कि उनके क्षेत्र को बैंकों से कर्ज मिलने में खासी परेशानी हो रही है। टेक्नोप्लस सर्विसेज बॉयलर और एनर्जी ऑडिट के साथ ही आयतित इंजीनियरिंग गुड्स का वितरण करती है। दूसरे लघु उद्यमी का कहना है कि बाजार के हालात बहुत खराब चल रहे हैं और कोई भी पैसा उधार देने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि दरअसल बैंक बाजार के हालात सुधरने का इंतजार कर रहे हैं। उनका मानना है कि बैंकों का एसएमई में भरोसा बढ़ाने के लिए इन्हें क्रेडिट में डालना चाहिए। मझोले और छोटे उद्योगों की रेटिंग का तकरीबन 75 फीसदी खर्च लघु उद्योग मंत्रालय ही उठाता है। इस समय पीई और वेंचर कैपिटल फंडिंग में भी हलचल हो रही है। एसएमई चेंबर ऑफ इंडिया के महासचिव वीके वेंकटाचलम के मुताबिक इस तरह के फंड 3-4 वर्ष के लिए दिए जाते हैं। इस समय भी इसमें कोई्र परिवर्तन नहीं किया गया है। उन्होंने बताया बीते छह महीनों के दौरान एसएमई ने ऐसे फंड लेना शुरू कर दिया है। एसएमई फाइनेंसिंग के विशेषज्ञ राजेश दुबे के मुताबिक वेंचर कैपिटल फंड अच्छी योजनाओं और बेहतर क्षमता वाली कंपनियों को ही दिए जाते हैं। च्यादातर वैंचर कैपिटल निवेश से पहले विनिवेश के सभी विकल्पों पर विचार कर लेते हैं। हालांकि हालातों में बदलाव आ रहा है। स्क्वेयरफुट के निदेशक अभिषेक श्राफ बताते हैं कि कुछ पीई प्लेयर्स ने उनके बिजनेस पर पैसा लगाने में रुचि दिखाई है। दुबे के मुताबिक बहुत से एसएमई असुरक्षित कर्ज से भी पैसा जुटा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कुछ मामलों में क्लाइंट कंपनी एसएमई को बैंक से लोन दिलाने की गारंटी दे रही हैं। दुबे ने बताया कि राच्य वित्तीय आयोग ने भी वित्तीय मदद बढ़ा दी है। स्थानीय संस्थाओं के अलावा वैश्विक संस्थाओं ने भी एसएमई की तरफ मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। ये संस्थाएं फंड मुहैया कराने के साथ ही उनकी क्षमता बढ़ाने के तरीके भी सुझा रही हैं।