Tuesday, March 2, 2010

सोया प्रोसेसिंग में भी आजमाएं हाथ

सेहत के लिए फायदेमंद होने के कारण डीओसी और तेल के अलावा भी सोया प्रोसेसिंग से तैयार उत्पादों का बाजार दिन पर दिन बढ़ रहा है। इन उत्पादों में सोया दूध, पनीर, दही, लस्सी, सोया दाल, सोया आटा एवं इसके बेकरी उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है। इस आधार पर सोयाबीन प्रोसेसिंग में उद्योगों के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं।बड़े उद्योगपतियों के साथ ही छोटे उद्यमियों के लिए भी इस क्षेत्र में आगे बढऩे के लिए अभी पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। विशेषज्ञों के अनुसार न्यूनतम 2 लाख रुपये का निवेश कर प्रतिदिन (8 घंटे की शिफ्ट) एक क्विंटल सोया आटा उत्पादन किया जा सकता है। इससे उत्पादन में साल भर में 10-11 लाख रुपये तक कारोबार किया जा सकता है। जिसमें सवा से डेढ़ लाख रुपये तक का मुनाफा कमाया जा सकता है। इसी तरह सोया दूध, पनीर, दही, लस्सी या इससे जुड़े अन्य उत्पादों के लिए लगभग 3 लाख रुपये का निवेश कर आठे घंटे की शिफ्ट में प्रतिदिन 50 किलो पनीर (टोफू) का उत्पादन होता है। मौजूदा बाजार भाव 50 किलो प्रतिदिन की उत्पादन क्षमता के साथ 5 लाख रुपये तक का सालाना कारोबार किया जा सकता है। जिसमें से एकसे सवा लाख रुपये का लाभ शामिल रहता है। इसी तरह बिस्किट अथवा बेकरी उत्पाद की छोटी इकाई लगाने के लिए न्यूनतम 1 लाख रुपये लगाकर आठ घंटे की शिफ्ट में प्रतिदिन 50 किलो बिस्किट बनाए जा सकते हैं। जिसमें सामान्यत: छह से सात लाख रुपये का सालाना कारोबार होने पर एक लाख रुपये का सीधा फायदा उद्यमी को होता है। इसी तरह सभी इकाइयों में निवेश के अनुपात में उत्पादन, सालाना कारोबार और मुनाफे की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। इन्हीं इकाइयों में सोया सॉस सहित सोयाबीन के अन्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं।इनकी स्थापना के लिए केन्द्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ लिया जा सकता है। वहीं मप्र की राजधानी भोपाल स्थित सोयाबीन प्रसंस्करण एवं उपयोग केन्द्र, केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान द्वारा नाममात्र का शुल्क लेकर सोया दूध, सोया पनीर, सोया आटा सहित अन्य बेकर उत्पाद, स्नेक्स, सोया पोहा, सोया श्रीखंड, सोया आइसक्रीम, सोया सत्तू, सोया बड़ी सहित अन्य उत्पादों से संबंधित इकाई लगाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण एवं जानकारी दी जाती है। संस्थान द्वारा इसके लिए सालभर में 12 बैचों के अंतर्गत प्रशिक्षण दिया जाता है।खास बात यह है कि देश केकु ल सोयाबीन उत्पादन में मप्र करीब 76 प्रतिशत भागीदार के साथ पहले नंबर पर है। सोयाबीन अन्य अनाजों की तुलना में मानव स्वास्थ्य के लिए विशेष तौर पर अधिक पौष्टिकमाना जाता है। इसमें प्रोटीन की मात्रा 40 प्रतिशत होती है, जो कि अन्य अनाजों की तुलना में ज्यादा है। इन सबके बावजूद भी मप्र में तेल और डीओसी के अलावा अन्य खाद्य उत्पाद बनाने वाली इकाईयों की संख्या बेहद कम है। मप्र में इस समय सोयाबीन प्रसंस्करण आधारित इकाइयों की संख्या महज 21 के आसपास है। वहीं पंजाब में 70, दिल्ली में 30, आंध्रप्रदेश में 25, महाराष्ट्र में 25 सहित पूरे भारत में कुल मिलाकर 225 इकाइयां ही सोया दूध एवं बेकरी के अन्य उत्पाद बना रही है।

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