Friday, March 5, 2010

उपयुक्त फंड चुनने के लिए अपनाएं कुछ फंडे

म्यूचुअल फंड्स तेजी से खुदरा निवेशकों के लिए इंवेस्टमेंट व्हीकल के रूप में लोकप्रिय हो रहे हैं। लेकिन अब भी उपयुक्त फंड चुनना निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। लेकिन यह काम ज्यादा कठिन नहीं है। अपना वित्तीय भविष्य सुरक्षित करने के लिए निवेशकों को केवल थोड़ा सा अनुशासन और समय खर्च करना पड़ेगा। कुछ नियमकों को अपना कर सही निवेश किया जा सकता है और आसानी से वित्तीय लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।अपने बारे में पूरी तरह जानेंअपना वित्तीय लक्ष्य हासिल करने के लिए सबसे जरूरती और पहला काम है अपने आप के बारे में पूरी तरह जानना। इस बात का अनुमान लगाने की कोशिश कीजिए कि आप कितना रिस्क उठा सकते हैं। अपनी सहनशीलता का परीक्षण कीजिए। यदि आपने 10,000 रुपये का निवेश किया और बाजार गिरने से यह घटकर 6,000 रुपये ही रह गया तो आप विचलित हो उठते हैं और तनाव में आ जाते हैं। भले ही यह बढ़कर वापस अपने पहले स्तर पर आ जाता है, लेकिन इससे यह बात तो स्पष्ट हो जाती है कि आक्रामक यानी ज्यादा रिस्की इक्विटी फंड में निवेश आपको नहीं करना चाहिए।वास्तविकता से दूर न होंआपका लक्ष्य क्या है? यदि आप अपने 10,000 रुपये के निवेश को दो साल में 50,000 रुपये करना चाहते हैं तो एक मध्यम अवधि वाला बांड फंड आपके लिए सही नहीं है। इसलिए अपने लक्ष्यों और अपने फंड के लिए वास्तविकता में रहते हुए अपनी उम्मीदें तय कीजिए।जानिए, आप क्या खरीद रहे हैंजब आपने अपने बारे में जान लिया यानी अपनी क्षमताओं को परख लिया तो फंडों को नजदीक से जानने पर थोड़ा समय खर्च कीजिए। बहुत से फंडों के प्रोस्पेक्टस में दिया गया उद्देश्य काफी अधूरा सा होता है और वास्तविकता से मेल नहीं खाता है। सहज रूप से उपलब्ध पोर्टफोलियो और फंड मैनेजरों की समीक्षा के आधार पर आप फंड्स की कार्यशैली और रणनीति को अच्छी तरह से समझ सकते हैं। इससे आपको अपना पोर्टफोलियो सार्थक रूप से डाइवर्सिफाई करने में मदद मिलेगी। इससे आपको संभावित रिस्क को आंकने में भी मदद मिलेगी। आमतौर पर लार्ज कैप वाले वैल्यू फंड्स कम रिस्की होते हैं जबकि स्मॉल कैप वाले ग्रोथ फंड्स ज्यादा रिस्क वाले होते हैं।सेक्टर की क्षमता का मूल्यांकन करेंआपको इस बात की जानकारी जरूर रखनी चाहिए कि जिन फंड्स ने अपनी ज्यादातर पूंजी एक या दो सेक्टर्स के शेयरों में लगा रखी है उनमें ज्यादा उतार चढ़ाव होगा। पूरी तरह से डाइवर्सिफाइड फंडों में यह खतरा कम होता है। फंड का सेक्टोरल इतिहास देखने से आपको फायदा होगा। क्या फंड मैनेजर किसी सेक्टर में जल्दी-जल्दी घुस और बाहर हो रहे हैं। यदि ऐसा है तो उस फंड में निवेश से आपको घाटा उठाना पड़ सकता है, यदि मैनेजर ने कोई गलत कदम उठा लिया।पोर्टफोलियो है महत्वपूर्ण एक ऐसा पोर्टफोलियो जो 20 या 30 स्टॉक ही रखता है और उनमें से भी कुछ में ही ज्यादातर निवेश करता है उसमें उतार-चढ़ाव या कहें कि रिस्क उस फंड के मुकाबले ज्यादा होता है जिसका पोर्टफोलियो 100 से भी ज्यादा शेयरों तक फैला है। लेकिन इस कंसेंट्रेशन का फायदा भी मिल सकता है यदि ये शेयर मार्केट में जोर दिखाते हैं तो रिटर्न भी ऐसे पोर्टफोलियो में ज्यादा होगा। ऐसे में आप अपने पोर्टफोलियो में एक कंसेंट्रेटेड फंड भी जोड़ सकते हैं। ऐसे फंड जो 10 या 20 शेयरों में ही अपना ज्यादातर निवेश करते हैं। लेकिन बड़े स्तर पर आपके कोर फंड्स अच्छी तरह से डाइवर्सिफाइड होने चाहिए जिनके बारे में सही अनुमान भी लगाया जा सके। ऐसे में थोड़े से शेयरों में ज्यादा निवेश करने वाला फंड आपके निर्टन को बढ़ा सकता है, लेकिन पूरी तरह से डायवर्सिफाइड फंड आपका रिस्क कम करने में मदद करेगा। फंड के प्रदर्शन की सही समीक्षा करेंध्यान रखें, फंड का पिछला प्रदर्शन भविष्य के अच्छे परिणाम की गारंटी नहीं है। निवेशकों को इस बात का हमेशा ख्याल रखना चाहिए। यह बात आपको अपने बैंक अकाउंट नंबर से भी ज्यादा अच्छे से याद होनी चाहिए। किसी भी फंड में निवेश करते समय जरूरत अपने आप में इस बात को दोहराना चाहिए। क्योंकि हो सकता है कि कुछ महीनों की तेजी के बाद गिरावट का दौर आने वाला हो और आपको झटका लग जाए। वर्ष 2000 में आईसीई के कंसेंट्रेटेड फंडों के साथ ऐसा हो चुका है। इस बात का भी ख्याल रखें कि शॉर्ट टर्म रिटर्न पर फोकस न करें। जब फंड चुनना हो तो उसके तिमाही दर दिमाही और साल दर साल के प्रदर्शन को देखें।अपने पोर्टफोलियो को समझेंयदि आपका पोर्टफोलियो लार्ज कैप के शेयरों पर ज्यादा ही केंद्रित है। ज्यादा रिटर्न देने वाले लेकिन रिस्की शेयरों पर केंद्रित है। ऐसे में स्मॉल कैप वाले शेयरों पर भी आपको ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा एक अनुशासित निवेशक बनने की भी जरूरत है। एक बार फंड चुन लिया तो उसके साथ रहिए और आगे जाने से डरिए मत।

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