Friday, March 12, 2010

आंवले की प्रोसेसिंग से करें कमाई

लगातार बढ़ते आयुर्वेद के महत्व के साथ ही आंवला और इसके उत्पादों का बाजार भी बढ़ रहा है, जिसके चलते आवंला प्रसंस्करण श्रेत्र में रोजगार की संभावनाएं बनी हैं। इस समय उत्तर प्रदेश के कई इलाकों (मुख्य तौर पर प्रतापगढ़) में आवंला प्रसंस्करण एक घरेलू उद्योग का रूप ले चुका है। देश के दूसरे भागों में भी बेहद कम निवेश में आवंला प्रसंस्करण की इकाइयां आसानी से लगाईं जा सकती हैं। अभी मप्र में करीब 10 हजार हेक्टेयर में आंवला की खेती की जा रही है। आवंला की प्रोसेसिंग कर इसका मुरब्बा, जैम, जैली, मीठी केंडी, नमकीन केंडी, सुपारी, आचार, चटनी, लड्डू, बरफी, टॉफी, बिस्किट, जूस, शरबत, स्कैवश जैसे फ्रूट प्रोडक्ट बनाए जा सकते हैं। वहीं हेयर शैम्पू, हेयर ऑयल, हेयर डाई, फेसपैक के रूप में सौंदर्य प्रसाधन भी तैयार किए जा सकते हैं। इसके अलावा औषधीय गुण होने के कारण आंवला के कई औषधीय उत्पाद भी बन सकते हैं। जिनमें च्यवनप्राश, आमलकी रसायन, त्रिफला पावडर, ब्रम्ह रसायन, आमलकी अवलेह, धान्नी लोह, आमलकी घृत सहित कई अन्य औषधियां बनाई जा सकती हैं। साथ ही साथ आंवले से आंवला पल्प, स्याही, साबुन भी बनाए जा सकते हैं। आंवले के फ्रूट प्रोडक्ट बनाने के लिए जहां फ्रूट प्रोडक्ट आर्डर (एफपीओ) प्रमाण पत्र लेना पड़ता है। वहीं औषधीय उत्पादों के लिए ड्रग लाइसेंस जरूरी है। आंवला प्रसंस्करण की छोटी इकाई लगाने के लिए करीब पांच लाख रुपये की जरूरत होती है। वहीं घरेलू उद्योग के रूप में बिना किसी निवेश के भी आंवले का प्रसंस्करण किया जा सकता है। छोटी प्रसंस्करण इकाई के लिए बॉयलर, ग्रेटर, हाइड्रोलिक प्रेस, केबिन ड्रायर, पैकिंग मशीन आदि उपकरणों की जरूरत होती है, जबकि घरेलु उद्योग के लिए कड़ाई, टब, गैस अथवा लकडिय़ों का चूल्हा सहित अन्य घरेलू उपकरण इस्तेमाल किए जा सकते हैं। इसके अलावा बड़े स्तर पर आंवला प्रसंस्करण प्रोजेक्ट लगाने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण रोजगार योजना के तहत 25 लाख रुपये तक ऋण भी लिया जा सकता है। जिसमें सामान्य वर्ग के उद्यमी को 10 प्रतिशत राशि खुद लगानी होती है, वहीं सरकार 25 प्रतिशत सब्सिडी देती है। महिला, एससीएसटी, ओबीसी वर्गों के लिए 5 प्रतिशत राशि खुद वहन करनी होगी, वहीं इस ऋण में सरकार से उन्हें 35 प्रतिशत सब्सिडी मिलती है।

1 comment:

Dr.Aalok Dayaram said...

आंवला फ़ल की प्रोसेसिंग विषयक जानकारी अति महत्वपूर्ण है। हमारे इलाके(मंदसौर जिला) में किसानों ने हजारों पेड आंवले के लगाये थे। ५ साल बाद जब उन पर फ़ल आने लगे तो बाजार में १५०-२०० रूपये क्विन्टल बिके। निराश होकर किसानों ने सभी पेड काट गिराये। अगर बागवानी विभाग आंवला प्रसंस्करण की जानकारी देता तो हजारों पेड कटने से बच जाते और किसानों को भी भरपूर लाभ होता}