Monday, April 19, 2010

फ्रूट बार बनाने से होगी अच्छी आमदनी

विभिन्न क्षेत्रों में तमाम तरह के फसल अलग-अलग मौसम में उगते हैं। नई फसल के समय फलों की मंडियों में सप्लाई इतनी ज्यादा होती है कि उत्पादकों को अच्छे दाम नहीं मिल पाते हैं। फल खराब होने से पहले बेचने के दबाव के कारण उत्पादक सस्ते मूल्य पर बेचने को विवश हो जाते हैं। लेकिन फलों की प्रोसेसिंग करके उत्पाद बनाने से बेहतर मूल्य पाना आसान हो सकता है। कई राज्यों में आम, संतरा, केला, अमरूद, सेब जैसे गूदादार फल पैदा होते हैं। इन फलों से फ्रूट बार बनाई जा सकती है। फ्रूट बार में फलों के सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। स्वादिष्ट और पोषक होने के कारण फ्रूट बार क अच्छी मांग रहती है। सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएफटीआरआई) मैसूर के वैज्ञानिकों ने फलों से फ्रूट बार बनाने की बेहद सरल विधि तैयार की है। सीएफटीआरआई द्वारा विकसित विधि से तैयार फ्रूट बार को करीब तीन महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इन फ्रूट बार को आकर्षक पैकिंग में पेश करके बाजार में काफी लाभ कमाया जा सकता है। फ्रूट बार बनाने की विधिफ्रूट बार को बनाने की विधि बेहद सरल है और सीएफटीआरआई के वैज्ञानिकों ने इस विधि का पूरी तरह मानकीकरण किया है। फ्रूट बार बनाने के लिए ताजे और पके हुए फलों का उपयोग किया जाता है। सबसे पहले फलों को अच्छी तरह से धोकर उनका गूदा निकाल लिया जाता है। फिर इस गूदे को चीनी की आवश्यक मात्रा में मिला दिया जाता है। आमतौर पर चीनी की मात्रा को गूदे के बराबर रखी जाती है। फिर इस मिश्रण को ट्रे ड्रायर में सुखाया जाता है। ट्रे ड्रायर में इस मिश्रण को करीब 18 से 20 घंटे तक सुखाया जाता है। फिर इसके ठंडा करके तय आकार के छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद फ्रूट बार को आकर्षक पैकिंग में पैक करने के बाद बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता है। फ्रूट बार बनाने की मशीनकरीब 60 टन की सालाना क्षमता वाले इस फ्रूट बार बनाने की मशीनरी पर करीब 4.32 लाख रुपये का खर्च आता है और इसके लिए लगभग 100 वर्ग फुट के स्थान की आवश्यकता होती है। अगर जगह अपनी है तो सभी खर्च मिलाकर करीब 5.57 लाख रुपये तक आता है। इसमें उत्पादन के लिए 11 कर्मचारियों की जरूरत होती है। फ्रूट बार बनाने के लिए दो फलों की सफाई के टैंक (करीब 12,000 रुपये), एक गूदा निकालने का उपकरण (करीब 70,000 रुपये), 100 लीटर की क्षमता वाली दो दोहरी परत वाली भांप की कढ़ाइयां (करीब 30,000 रुपये), एक छोटा बॉयलर 100 किलोग्राम (करीब 75,000 रुपये), एक फ्रूट मिल (करीब 80,000 रुपये), 48 ट्रे वाला ट्रे ड्रायर (करीब 1,00,000 रुपये) और वजन तौलने की मशीन व अन्य उपकरण (करीब 65,000 रुपये) की जरूरत होती है। इस प्लांट में उत्पादन करके सभी नियमित खर्च निकालने के बाद सालभर में करीब तीन लाख रुपये तक की आसानी से आय हासिल की जा सकती है। सीएफटीआरआई यह प्लांट लगाने के लिए पूरी जानकारी और मदद देता है। फलों की फ्रूट बार बनाकर उत्पादक आसानी से ज्यादा आय हासिल कर सकते हैं। फ्रूट बार पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के अलावा स्वादिष्ट होती है, इस वजह से इसकी मांग हर छोटे-बड़े शहर होती है। इस वजह से फ्रूट बार बेचने के लिए उत्पादकों को बाजार की तलाश में कहीं भटकना नहीं पड़ेगा। वे अपने शहर-कस्बे में ही छोटे दुकानदारों से इसकी बिक्री के लिए संपर्क कर सकते हैं। उत्पादक फ्रूट बार की कीमत बाजार में उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति के अनुसार तय कर सकते हैं। मसलन छोटे कस्बों में दाम कम रखे जा सकते हैं। लेकिन कम दाम पर भी इसकी बिक्री से अच्छी आय होती है क्योंकि फलों के मुकाबले फ्रूट बार के दाम कई गुना ज्यादा रहते हैं।

Monday, April 5, 2010

सही उम्र में कराएं हेल्थ इंश्योरेंस

अच्छी सेहत को भी वरदान माना जाता है। पर इस वरदान को भी सुरक्षा की जरूरत पडऩे लगी है। आज के जमाने में जीवन शैली और खान-पान के तौर-तरीके बदलने से बीमारियों का नेचर बदल गया है। इसके साथ-साथ हेल्थ केयर के खर्चे भी बेतहाशा बढ़ गए हैं। परिवार के एक सदस्य को भी अगर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है, तो मेडिकल बिल देखकर दिन में तारे नजर आने लगते हैं। ऐसे ही हालात में आर्थिक सुरक्षा देने का काम करता है हेल्थ इंश्योरेंस। पर लोगों के साथ आमतौर पर एक समस्या आती है कि इसे कब खरीदें? यानी हेल्थ इंश्योरेंस किस उम्र में कराया जाए? जीवन शैली और जरूरत का ध्यान रखें हेल्थ इंश्योरेंस कब कराया जाए? इस सवाल के जवाब के लिए सही तरीका ये है कि आप अपनी जीवन शैली और जरूरत को समझें। हर इंसान को खुद यह निर्णय करना होता है कि उसकी जीवन शैली और उसकी पारिवारिक जरूरतों के आधार पर उसकी आवश्यकताएं क्या हैं। वह किस तरह का लाभ चाहता है। उसे कितनी राशि का कवर चाहिए और यह भी कि उसकी लागत क्या है। इसके बाद वह बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर नजर डाले व देखें कि उसके मापदंड पर कौन सी हेल्थ इंश्योरेंस योजना खरी उतरती है। कम उम्र में लेने से फायदा आज की उतार-चढ़ाव भरी दुनिया में हेल्थ इंश्योरेंस लेने का फैसला जल्दी करें। सबसे बेहतर तो यह रहेगा कि इसे कम उम्र में ही ले लें। जैसे-जैसे आपकी आयु उम्र बढ़ेगी वैसे-वैसे इसका प्रीमियम भी बढ़ता जाता है। बता दें कि ३ माह से लेकर ६० साल या इससे ज्यादा उम्र का कोई भी इंसान हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले सकता है। तीन तरह की पॉलिसियां हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट में मौजूदा समय में तीन तरह की कंपनियां सक्रिय हैं- लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां, जनरल इंश्योरेंस कंपनियां और विशुद्ध हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां। इसी तरह से तीन तरह की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां भी हैं- एक, जिनमें सभी प्रकार के हॉस्पिटलाइजेशन को कवर किया जाता है। दो, जिसमें हॉस्पिटल में भर्ती होने पर क्लेम का भुगतान किया जाता है और तीसरी वह जिनमें क्रिटिकल इलनेस व क्रिटिकल सर्जरी के खर्चों की भरपाई की जाती है। देखें बीमारियों का कवरेज कुछ योजनाओं में जोखिम कवर नहीं होते। और जब जरूरत पडऩे पर पॉलिसी काम न आए तो क्या फायदा? लिहाजा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी चुनते समय यह जरूर देखें कि किन बीमारियों को कवर के दायरे में रखा गया है और किन बीमारियों को नहीं? रिन्युअल की मैक्सिमम उम्र पॉलिसी में यह भी देखेें कि बीमा कवर के रिन्युअल की अधिकतम आयु सीमा क्या है। जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है वैसे-वैसे किसी भी इंसान के लिए नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हासिल करना मुश्किल होने लगता है। तब सभी प्रकार के वेटिंग पीरियड लागू हो जाते हैं और फिर मौजूदा बीमारियां भी इस कवर के दायरे में नहीं रखी जाती। प्रीमियम के आधार पर नहीं बाजार में तरह-तरह के हेल्थ इंश्योरेंस प्लान मौजूद हैं-बेसिक कवर से लेकर जटिल सर्जिकल प्रोसीजर्स, क्रिटिकल इलनेस और हॉस्पिटलाइजेशन नकद भरपाई तक। लेकिन आप जब भी अपने लिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदें तब अपना फैसला महज बीमा प्रीमियम की राशि के आधार पर न करें। अलग-अलग बीमा कवर आपको भिन्न-भिन्न लाभ देंगे व इन सबकी विशेषताएं अलग होंगी लिहाजा इनके प्रीमियम में भी अंतर होगा। फैमिली फ्लोटर अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस की फैमिली फलोटर पॉलिसी को अच्छा विकल्प माना जाता है। दरअसल अगर आप परिवार के हर सदस्य के लिए अलग पॉलिसी लेंगे तो सौदा मंहगा हो सकता है। पर फैमिली फलोटर प्लान में कवर की लागत पूरे परिवार के सदस्यों में बांटी जा सकती है। लिहाजा यह विकल्प सस्ता भी पड़ता है। पर ध्यान रहे इसका प्रीमियम परिवार के सबसे सीनियर मेंबर की उम्र के हिसाब से तय किया जाता है और जैसे जैसे-जैसे उसकी आयु बढ़ेगी वैसे-वैसे इसका प्रीमियम भी बढ़ता जाता है। टॉप-अप प्लान यदि आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस है और आप इंश्योरेंस कवर में बढ़ोतरी चाहते हैं तो नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से बेहतर रहेगा कि इंश्योरेंस कंपनियों के टॉप-अप प्लान पर ध्यान दें। कई कंपनियां इस तरह के प्लान पेश करती हैं। यह आपके हेल्थ इंश्योरेंस कवर की लागत को कम करने का एक अच्छा जरिया हो सकता है।

घर खरीदने में जितनी देरी उतना नुकसान

अपना घर खरीदना सबका सपना होता है। ऐसे में आपके पास दो विकल्प हैं। या तो आप अभी घर खरीद लें और 20 साल तक मासिक किस्त (ईएमआई) चुकाते रहें। दूसरा किराए के घर में रहें और बची रकम से बाद में घर खरीद लें। आपको कौनसा विकल्प वित्तीय दृष्टि से उचित लगता है। घर के लिए किराया देना या घर खरीदना। क्या किराए के घर की अपने घर से कोई तुलना है? यहां दोनों विकल्पों की तुलना की गई है। पहले विकल्प में आप अभी घर खरीद सकते हैं जिसमें डाउन पेमेंट करते हैं और बाकी बैंक से लोन ले सकते हैं। इसमें आप 20 साल तक ईएमआई चुकाते हैं और तब आपको घर का मालिकाना हक मिलता है। दूसरे विकल्प में आप एक कम किराए के मकान में रह सकते हैं। किराया मकान की ईएमआई से काफी कम होता है और इस बची रकम को अच्छी जगह निवेश कर सकते हैं। इस रकम से आप 20 साल बाद मकान खरीद सकते हैं। आंकड़ों की नजर में अपना घरयहां मुंंबई के उपनगर में 2 बीएचके अपार्टमेंट का उदाहरण लेते हैं। मानो यह मकान आपको आज 75 लाख रुपये में उपलब्ध है। इसका 85 फीसदी आपको लोन मिल जाएगा। इसलिए आपको 11.25 लाख रुपये का डाउन पेमेंट करना पड़ेगा और बाकी 63.75 लाख रुपये का आप होम लोन लेते हैं। 20 साल के लिए आपको हर महीने करीब 65,344 रुपये की किस्त चुकानी होगी और बीस साल बाद वह घर आपका हो जाएगा। उस समय आपके घर की कीमत क्या होगी? यदि पिछले रिकॉर्ड पर नजर डालें तो प्रॉपर्टी में निवेश ने लंबी अवधि में 15 फीसदी रिटर्न दिया है। कम से कम 10 फीसदी रिटर्न भी मानें तो 20 साल बाद आपका घर 5.06 करोड़ रुपये का होगा। तब आप एक पांच करोड़ रुपये से भी ज्यादा कीमत वाले घर के मालिक होंगे। किराए पर रहने में क्या स्थितिअब देखें किराए के मकान वाला विकल्प। यदि आप ऐसे ही घर का मासिक किराया फिलहाल 22,000 रुपये चुकाते हैं तो 65,344 रुपये की ईएमआई के मुकाबले रकम बची 43,344 रुपये महीना। क्या आप यह रकम 20 साल के लिए कहीं निवेश कर सकते हैं। नहीं! क्योंकि मकान की कीमत बढऩे के साथ ही किराया भी बढ़ता रहेगा। ऐसे में मान लीजिए किराए में हर साल कम से कम 6 फीसदी की बढ़ोतरी होती है और आपका मासिक निवेश साल-दर साल घटता जाएगा। वास्तव में आप 20 साल ही निवेश कर पाएंगे क्योंकि 20 वें साल तो किराया ईएमआई से भी ज्यादा हो जाएगा। इस हिसाब से 20वें साल में किराया 66,563 रुपये प्रति माह हो जाएगा। 20 साल बाद आपका बचाकर किया गया निवेश कितना हो जाएगा। आप 20 साल की लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं, ऐसे में आप स्टॉक मार्केट में निवेश कर अच्छा रिटर्न ले सकते हैं। मानिए आपको 12 फीसदी रिटर्न मिल जाएगा। ऐसे में 20 साल बाद आपका निवेश बढ़कर 2.82 करोड़ रुपये हो जाएगा, जो 20 साल बाद उस मकान की कीमत 5.06 करोड़ रुपये से काफी कम है। लेकिन रुकिए, हम यहां डाउन पेमेंट के रूप में दिए गए 11.25 लाख रुपये को भूल रहे हैं जो आपको घर खरीदते समय करना पड़ता। जब आप किराए पर रहेंगे तो यह रकम भी आप बचा लेंगे। यदि आप इस रकम को भी 20 साल के लिए निवेश कर देते हैं और 12 फीसदी रिटर्न हासिल करते हैं तो यह बढ़कर 1.09 करोड़ रुपये हो जाएगा। ऐसे में 20 साल बाद आपके पास 3.91 करोड़ रुपये जमा होंगे। दुर्भाग्य से यह रकम भी 20 साल बाद उस मकान की संभावित कीमत 5.06 करोड़ रुपये से काफी कम है। ऐसे में अभी घर खरीदने का विकल्प किराए पर रहकर 20 साल बाद घर खरीदने के मुकाबले कहीं ज्यादा फायदेमंद है। इसलिए जितना जल्दी हो सकता है घर खरीद लीजिए। यह एक ऐसी संपत्ति होगा जिसकी वैल्यू भविष्य में काफी ज्यादा होगी। लंबे समय के लिए प्रॉपर्टी में निवेश काफी बेहतर साबित होगा।

Friday, April 2, 2010

पोस्ट ऑफिस की स्कीमों का भी फायदा उठाएं

देश में म्यूचुअल फंड और शेयर मार्केट के निवेश के विकल्प होने के बाद भी कई निवेशक अब भी सुरक्षा को ज्यादा महत्व देते हैं। सुरक्षित रिटर्न देने वाले साधनों में पोस्ट ऑफिस की स्कीमों का बड़ा आकर्षण रहा है। इन स्कीमों के साथ सरकारी जुड़ाव होने की वजह से लाखों निवेशक इनमें अपना पैसा लगाते हैं। पोस्ट ऑफिस की मंथली इनकम स्कीम और रिकरिंग डिपॉजिट बीते कई साल से देश की लोकप्रिय स्कीमों में से एक रही हैं। अगर आप भी ऐसे निवेशकों में हैं, जो परंपरागत उत्पादों को तवज्जो देते हैं, तो फिर ये आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकते हैं। पोस्ट ऑफिस मंथली इनकम स्कीम अपना पैसा के सीईओ हर्ष रूंगटा के मुताबिक मंथली इनकम स्कीम के नाम से ही जाहिर होता है कि इसमें ब्याज की रकम हर महीने दी जाती है। ये स्कीम पूरी तरह सरकार की ओर से प्रायोजित है। निवेशक अपनी रकम पोस्ट ऑफिस में जमा करते हैं। और इस पर ८ फीसदी सालाना के हिसाब से ब्याज दिया जाता है। ब्याज की रकम हर महीने आपके बचत खाते में डाल दी जाती है। इससे आपको हर महीने पोस्ट ऑफिस जाने की जरूरत नहीं होती है। एमआईएस की अवधि ६ साल की होती है। आपकी रकम इस समय अवधि के लिए लॉक की जाती है। स्कीम की मैच्योरिटी पर 5 फीसदी बोनस भी मिलता है। इस तरह पूरी स्कीम पर प्रभावी ब्याज दर 8.9 फीसदी के आस-पास हो जाती है। पर एक बात ध्यान रखें इस पर 80सी के तहत इनकम टैक्स छूट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मंथली इनकम स्कीम के तहत आप ४,50,000 रुपये तक का निवेश कर सकते हैं। संयुक्त खाते में 9,00,000 रुपये तक का निवेश किया जा सकता है। रिकरिंग डिपॉजिट वित्तीय एवं निवेश सलाहकार नवनीत धवन के मुताबिक पोस्ट ऑफिस के रिकरिंग डिपॉजिट के तहत आप हर महीने एक निश्चित रकम जमा करते हैं। इस रकम पर आपको हर महीने ब्याज मिलता रहता है। इस तरह मंथली इनकम स्कीम और आरडी के बीच एक सिस्टम बनाने की जरूरत होती है। मतलब ये कि आप जो पैसा मंथली इनकम स्कीम से अर्जित करेंगे, उसे आरडी में निवेश कर सकते हैं। एक स्कीम आपका हर महीने का आमदनी का जरिया बन जाती है, तो दूसरी में निवेश की जरूरत पड़ती है। आप हर महीने मंथली इनकम स्कीम से मिले ब्याज को रिकरिंग डिपॉजिट में निवेश कर सकते हैं। इससे आपको ज्यादा ब्याज मिलना सुनिश्चित हो जाता है। इसके लिए आपको बार-बार पोस्ट ऑफिस जाने की भी जरूरत नहीं है। बस आपको अपने मंथली इनकम स्कीम और रिकरिंग डिपॉजिट अकाउंट को खोलते वक्त पोस्ट ऑफिस को बताना होगा कि हर महीने आपके एमआईएस के ब्याज को आपके रिकरिंग अकाउंट में डाल दिया जाए। इस तरह इन दोनों के कंबीनेशन से बचत और निवेश का एक बेहतरीन विकल्प बनाया जा सकता है।

थोड़ा-थोड़ा निवेश करके बनाएं बड़ी रकम

इक्विटी यानी शेयरों में किए जाने वाले निवेश को लेकर हमारे यहां आज भी आशंका भरी नजरों से देखा जाता है। पर हकीकत में अगर आपको एक बड़ी पूंजी बनानी है, तो शेयर बाजार से बेहतर रास्ता कोई नहीं हो सकता। इक्विटी में लंबे समय तक सावधानी से किया गया छोटा निवेश भी हर हाल में एक बड़ी रकम बन जाता है। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि शेयरों में निवेश के लिए एक बड़ी रकम की जरूरत होती है। पर ऐसा पूरी तरह सच नहीं है। एक निश्चित रकम को अगर किसी तय अवधि तक बाजार में लगाया जाए, तो इसके जरिए एक बड़ी रकम हासिल की जा सकती है। कैसे बनाएं पंूंजी थोड़े-थोड़े पैसे को शेयर बाजार में निवेशक करके एक बड़ी रकम बनाना बहुत मुश्किल भी नहीं है। मान लीजिए आप 40,000 रुपये महीना कमाते हैं। आप अपनी कुल आमदनी का 10 फीसदी निवेश कर सकते हैं। आप अपने पैसे को 30-35 साल तक निवेश कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में आपके रिटायरमेंट तक आपके पास एक बड़ी रकम उपलब्ध होगी। अगर 25 साल के हैं और 60 साल में रिटायर होना चाहते हैं। साथ ही परिवार के 3-4 सदस्य आप पर आश्रित हैं। और आपका मासिक खर्च करीब 25,000 रुपये है। इन हालात में आप इक्विटी में निवेश करके एक बड़ी रकम बनाना चाहते हैं। इसके लिए आपको एक बेहतरीन प्लान पर काम करना होगा। निवेश की योजना बनाएं अपने रिटायरमेंट के लिए आपको पैसा इकट्ठा करना है। चूंकि आपकी उम्र अभी बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए आप इक्विटी में निवेश कर सकते हैं। मान लेते हैं कि आप 5,000 रुपये प्रति माह डायवर्सिफाइड इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगा सकते हैं। ये निवेश आप रिटायरमेंट की उम्र तक कर सकते हैं। हालांकि इसमें बाद में बदलाव भी कर सकते हैं। पर मान लेते हैं कि आप ये पैसा रिटायरमेंट तक इसी फंड में लगाते रहेंगे। चूंकि आप 35 साल के लिए निवेश कर रहे हैं, इसलिए इस निवेश में जोखिम बेहद कम है। भले ही ये निवेश इक्विटी में किया जा रहा है, पर जोखिम यहां कम ही माना जाएगा। शेयर बाजार बहुत ज्यादा जोखिम शॉर्ट टर्म के निवेश पर ही होता है। 35 साल जैसी लंबी अवधि के लिए तो यह बिल्कुल भी रिस्की नहीं है। इसमें तो आप बहुत ही आकर्षक रिटर्न हासिल कर सकते हैं। यदि सेंसेक्स को ही लें तो पिछले 30 साल में यानी 1979 से 2009 तक इसने 15 से 17 फीसदी तक रिटर्न दिया है। ऐसे में अगर लांग टर्म के लिए निवेश कर रहे हैं तो कम से कम 15 फीसदी रिटर्न तो आप सुरक्षित मान सकते हैं। अब मूल बात पर आते हैं। निवेशकों को शुरुआती सालों में इतनी रकम का निवेश करने में परेशानी आ सकती है। बाद में उसकी जिम्मेदारियां बढ़ती चली जाएंगी। लेकिन कैरियर आगे बढऩे के साथ-साथ सेलरी भी बढ़ेगी और 5,000 रुपये मासिक निवेश ज्यादा कठिन नहीं होगा। कितना होगा निवेश आप हर महीने 5,000 रुपये निवेश कर सकते हैं। इसका मतलब ये हुआ कि आप साल में 60,000 रुपये इक्विटी में लगाएंगे। आपको चूंकि 35 साल तक निवेश करना है, इसका मतलब ये हुआ कि आप 35 साल में 21 लाख रुपये जमा करेंगे। मान लेते हैं इस पर आपको औसत रिटर्न 15 फीसदी हासिल होगा। इस तरह आपको 3,00,000 रुपये और मिल जाएंगे। इस तरह कुल आपको कुल रिटर्न 24 लाख रुपये मिल जाएगा। अब अगर इस ब्याज दर को जोड़कर रिटर्न निकालें तो 15 फीसदी की दर से ये रकम भी करीब 24 लाख रुपये बनती है। मान लेते हैं कि आपको कुल 50 लाख रुपये मिल जाएंगे। ये आकलन सिर्फ साधारण ब्याज दर के आधार पर निकाला गया है। आमतौर पर लोग इसी तरह सोचते हैं। पर ऐसा होता नहीं है। इसमें वार्षिक कंपाउंड इंटरेस्ट वाला फॉर्मूला नहीं अपनाया गया है, बल्कि एक साधारण सी गणना है जो कोई भी कर सकता है।कंपाउंड इंटरेस्ट रेट का चमत्कारपर ब्याज की गणना ऐसे होती नहीं है। कंपाउंड इंटरेस्ट रेट के आधार पर आकलन करने पर आपकी रकम करोड़ों में बदल जाएगी। सही-सही गणना के मुताबिक उसके पास करीब 7.43 करोड़ रुपये होंगे। आप सोच रहे होंगे कि इतनी बड़ी रकम कैसे संभव है। यह कंपाउंड (चक्रवृद्धि) ब्याज दर का चमत्कार है। ब्याज पर ब्याज मिलता है और यह बढ़ता रहता है। शुरुआत में ब्याज बहुत कम दिखता है, लेकिन समय के साथ यह राशि बढ़ती रहती है और 35 साल जैसी बड़ी अवधि के बाद तो यह राशि आपको अविश्वसनीय सी लगेगी। क्या आप विश्वास करेंगे कि 5,000 रुपये महीना निवेश करने पर आपको 35 साल बाद 1.04 करोड़ रुपये तो केवल ब्याज के मिलेंगे जो आपकी निवेश की गई मूल रकम से भी चार गुना है। यह सब कंपाउंड इंटरेस्ट का कमाल है इसीलिए तो महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने चक्रवृद्धि ब्याज को विश्व का आठवां अजूबा करार दिया था।10 साल बाद करें ऐशयदि आप 35 साल जितनी लंबी अवधि तक निवेश का दर्द नहीं सहन कर सकते तो कोई नहीं आप 10 साल तक निवेश कर मुक्ति पाइए। 5,000 रुपये महीना 10 साल तक निवेश करने के बाद बाकी 25 साल तक वह रकम कंपाउंड ब्याज से बढ़ती हुई एक बड़ी रकम बन जाएगी। ऐसे में आपके पास 2.12 करोड़ रुपये ही होंगे यानी आपको पहले के मुकाबले 5.88 करोड़ रुपये कम मिलेंगे। एक उपाय है, यदि आप चाहते हैं कि केवल 10 साल तक निवेश करके भी आपको 35 साल बाद 7.43 करोड़ रुपये ही मिलें तो मासिक निवेश आपको थोड़ा बढ़ाना पड़ेगा। आपको हर महीने 1,420 रुपये ज्यादा निवेश करना होगा। यानी 6,420 रुपये मासिक निवेश 10 साल तक कीजिए और अगले 25 साल तक उसे बढऩे के लिए छोड़ दीजिए। तब आपका धन 7.43 करोड़ रुपये हो जाएगा।पहले जितना बोझ, बाद में उतना आरामइससे आपको एक बात तो समझ में आ गई होगी कि पहले सालों में निवेश में जितना कष्ट सहन करेंगे बाद में उतना ही फायदा होगा। कैरियर के पहले सालों में कोई भी व्यक्ति ज्यादा निवेश करने की स्थिति में भी होता है क्योंकि तब जिम्मेदारियां कम होती हैं और निर्भर सदस्य भी कम होते हैं। यदि कोई 10 साल के लिए थोड़ा ज्यादा कष्ट लेकर 1,420 रुपये मासिक ज्यादा निवेश करता है तो निवेश से 25 साल भी बचा लेता है और उतनी ही रकम भी बना लेता है। यदि वह अपनी सेलरी का 50 फीसदी यानी 20,000 रुपये प्रति महीना दो साल के लिए निवेश कर सके तो भी वह इतनी रकम हासिल करने में कामयाब हो सकता है। 20,000 रुपये मासिक निवेश 2 साल तक करके अगले 33 साल उसे सुरक्षित छोडऩे पर उसकी रकम 9.24 करोड़ रुपये होगी। यदि आप सोचते हैं कि निवेश का यह मौका तो 5,10 या 20 साल पहले था तो चिंता मत कीजिए अब भी मौका है।