Monday, April 19, 2010

फ्रूट बार बनाने से होगी अच्छी आमदनी

विभिन्न क्षेत्रों में तमाम तरह के फसल अलग-अलग मौसम में उगते हैं। नई फसल के समय फलों की मंडियों में सप्लाई इतनी ज्यादा होती है कि उत्पादकों को अच्छे दाम नहीं मिल पाते हैं। फल खराब होने से पहले बेचने के दबाव के कारण उत्पादक सस्ते मूल्य पर बेचने को विवश हो जाते हैं। लेकिन फलों की प्रोसेसिंग करके उत्पाद बनाने से बेहतर मूल्य पाना आसान हो सकता है। कई राज्यों में आम, संतरा, केला, अमरूद, सेब जैसे गूदादार फल पैदा होते हैं। इन फलों से फ्रूट बार बनाई जा सकती है। फ्रूट बार में फलों के सभी पोषक तत्व मौजूद होते हैं। स्वादिष्ट और पोषक होने के कारण फ्रूट बार क अच्छी मांग रहती है। सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएफटीआरआई) मैसूर के वैज्ञानिकों ने फलों से फ्रूट बार बनाने की बेहद सरल विधि तैयार की है। सीएफटीआरआई द्वारा विकसित विधि से तैयार फ्रूट बार को करीब तीन महीने तक सुरक्षित रखा जा सकता है। इन फ्रूट बार को आकर्षक पैकिंग में पेश करके बाजार में काफी लाभ कमाया जा सकता है। फ्रूट बार बनाने की विधिफ्रूट बार को बनाने की विधि बेहद सरल है और सीएफटीआरआई के वैज्ञानिकों ने इस विधि का पूरी तरह मानकीकरण किया है। फ्रूट बार बनाने के लिए ताजे और पके हुए फलों का उपयोग किया जाता है। सबसे पहले फलों को अच्छी तरह से धोकर उनका गूदा निकाल लिया जाता है। फिर इस गूदे को चीनी की आवश्यक मात्रा में मिला दिया जाता है। आमतौर पर चीनी की मात्रा को गूदे के बराबर रखी जाती है। फिर इस मिश्रण को ट्रे ड्रायर में सुखाया जाता है। ट्रे ड्रायर में इस मिश्रण को करीब 18 से 20 घंटे तक सुखाया जाता है। फिर इसके ठंडा करके तय आकार के छोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है। इसके बाद फ्रूट बार को आकर्षक पैकिंग में पैक करने के बाद बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता है। फ्रूट बार बनाने की मशीनकरीब 60 टन की सालाना क्षमता वाले इस फ्रूट बार बनाने की मशीनरी पर करीब 4.32 लाख रुपये का खर्च आता है और इसके लिए लगभग 100 वर्ग फुट के स्थान की आवश्यकता होती है। अगर जगह अपनी है तो सभी खर्च मिलाकर करीब 5.57 लाख रुपये तक आता है। इसमें उत्पादन के लिए 11 कर्मचारियों की जरूरत होती है। फ्रूट बार बनाने के लिए दो फलों की सफाई के टैंक (करीब 12,000 रुपये), एक गूदा निकालने का उपकरण (करीब 70,000 रुपये), 100 लीटर की क्षमता वाली दो दोहरी परत वाली भांप की कढ़ाइयां (करीब 30,000 रुपये), एक छोटा बॉयलर 100 किलोग्राम (करीब 75,000 रुपये), एक फ्रूट मिल (करीब 80,000 रुपये), 48 ट्रे वाला ट्रे ड्रायर (करीब 1,00,000 रुपये) और वजन तौलने की मशीन व अन्य उपकरण (करीब 65,000 रुपये) की जरूरत होती है। इस प्लांट में उत्पादन करके सभी नियमित खर्च निकालने के बाद सालभर में करीब तीन लाख रुपये तक की आसानी से आय हासिल की जा सकती है। सीएफटीआरआई यह प्लांट लगाने के लिए पूरी जानकारी और मदद देता है। फलों की फ्रूट बार बनाकर उत्पादक आसानी से ज्यादा आय हासिल कर सकते हैं। फ्रूट बार पौष्टिक तत्वों से भरपूर होने के अलावा स्वादिष्ट होती है, इस वजह से इसकी मांग हर छोटे-बड़े शहर होती है। इस वजह से फ्रूट बार बेचने के लिए उत्पादकों को बाजार की तलाश में कहीं भटकना नहीं पड़ेगा। वे अपने शहर-कस्बे में ही छोटे दुकानदारों से इसकी बिक्री के लिए संपर्क कर सकते हैं। उत्पादक फ्रूट बार की कीमत बाजार में उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति के अनुसार तय कर सकते हैं। मसलन छोटे कस्बों में दाम कम रखे जा सकते हैं। लेकिन कम दाम पर भी इसकी बिक्री से अच्छी आय होती है क्योंकि फलों के मुकाबले फ्रूट बार के दाम कई गुना ज्यादा रहते हैं।

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