Monday, April 5, 2010

सही उम्र में कराएं हेल्थ इंश्योरेंस

अच्छी सेहत को भी वरदान माना जाता है। पर इस वरदान को भी सुरक्षा की जरूरत पडऩे लगी है। आज के जमाने में जीवन शैली और खान-पान के तौर-तरीके बदलने से बीमारियों का नेचर बदल गया है। इसके साथ-साथ हेल्थ केयर के खर्चे भी बेतहाशा बढ़ गए हैं। परिवार के एक सदस्य को भी अगर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है, तो मेडिकल बिल देखकर दिन में तारे नजर आने लगते हैं। ऐसे ही हालात में आर्थिक सुरक्षा देने का काम करता है हेल्थ इंश्योरेंस। पर लोगों के साथ आमतौर पर एक समस्या आती है कि इसे कब खरीदें? यानी हेल्थ इंश्योरेंस किस उम्र में कराया जाए? जीवन शैली और जरूरत का ध्यान रखें हेल्थ इंश्योरेंस कब कराया जाए? इस सवाल के जवाब के लिए सही तरीका ये है कि आप अपनी जीवन शैली और जरूरत को समझें। हर इंसान को खुद यह निर्णय करना होता है कि उसकी जीवन शैली और उसकी पारिवारिक जरूरतों के आधार पर उसकी आवश्यकताएं क्या हैं। वह किस तरह का लाभ चाहता है। उसे कितनी राशि का कवर चाहिए और यह भी कि उसकी लागत क्या है। इसके बाद वह बाजार में उपलब्ध विभिन्न प्रकार की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों पर नजर डाले व देखें कि उसके मापदंड पर कौन सी हेल्थ इंश्योरेंस योजना खरी उतरती है। कम उम्र में लेने से फायदा आज की उतार-चढ़ाव भरी दुनिया में हेल्थ इंश्योरेंस लेने का फैसला जल्दी करें। सबसे बेहतर तो यह रहेगा कि इसे कम उम्र में ही ले लें। जैसे-जैसे आपकी आयु उम्र बढ़ेगी वैसे-वैसे इसका प्रीमियम भी बढ़ता जाता है। बता दें कि ३ माह से लेकर ६० साल या इससे ज्यादा उम्र का कोई भी इंसान हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ले सकता है। तीन तरह की पॉलिसियां हेल्थ इंश्योरेंस मार्केट में मौजूदा समय में तीन तरह की कंपनियां सक्रिय हैं- लाइफ इंश्योरेंस कंपनियां, जनरल इंश्योरेंस कंपनियां और विशुद्ध हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां। इसी तरह से तीन तरह की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां भी हैं- एक, जिनमें सभी प्रकार के हॉस्पिटलाइजेशन को कवर किया जाता है। दो, जिसमें हॉस्पिटल में भर्ती होने पर क्लेम का भुगतान किया जाता है और तीसरी वह जिनमें क्रिटिकल इलनेस व क्रिटिकल सर्जरी के खर्चों की भरपाई की जाती है। देखें बीमारियों का कवरेज कुछ योजनाओं में जोखिम कवर नहीं होते। और जब जरूरत पडऩे पर पॉलिसी काम न आए तो क्या फायदा? लिहाजा हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी चुनते समय यह जरूर देखें कि किन बीमारियों को कवर के दायरे में रखा गया है और किन बीमारियों को नहीं? रिन्युअल की मैक्सिमम उम्र पॉलिसी में यह भी देखेें कि बीमा कवर के रिन्युअल की अधिकतम आयु सीमा क्या है। जैसे-जैसे आयु बढ़ती जाती है वैसे-वैसे किसी भी इंसान के लिए नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हासिल करना मुश्किल होने लगता है। तब सभी प्रकार के वेटिंग पीरियड लागू हो जाते हैं और फिर मौजूदा बीमारियां भी इस कवर के दायरे में नहीं रखी जाती। प्रीमियम के आधार पर नहीं बाजार में तरह-तरह के हेल्थ इंश्योरेंस प्लान मौजूद हैं-बेसिक कवर से लेकर जटिल सर्जिकल प्रोसीजर्स, क्रिटिकल इलनेस और हॉस्पिटलाइजेशन नकद भरपाई तक। लेकिन आप जब भी अपने लिए हेल्थ इंश्योरेंस खरीदें तब अपना फैसला महज बीमा प्रीमियम की राशि के आधार पर न करें। अलग-अलग बीमा कवर आपको भिन्न-भिन्न लाभ देंगे व इन सबकी विशेषताएं अलग होंगी लिहाजा इनके प्रीमियम में भी अंतर होगा। फैमिली फ्लोटर अच्छी हेल्थ इंश्योरेंस की फैमिली फलोटर पॉलिसी को अच्छा विकल्प माना जाता है। दरअसल अगर आप परिवार के हर सदस्य के लिए अलग पॉलिसी लेंगे तो सौदा मंहगा हो सकता है। पर फैमिली फलोटर प्लान में कवर की लागत पूरे परिवार के सदस्यों में बांटी जा सकती है। लिहाजा यह विकल्प सस्ता भी पड़ता है। पर ध्यान रहे इसका प्रीमियम परिवार के सबसे सीनियर मेंबर की उम्र के हिसाब से तय किया जाता है और जैसे जैसे-जैसे उसकी आयु बढ़ेगी वैसे-वैसे इसका प्रीमियम भी बढ़ता जाता है। टॉप-अप प्लान यदि आपके पास हेल्थ इंश्योरेंस है और आप इंश्योरेंस कवर में बढ़ोतरी चाहते हैं तो नई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी लेने से बेहतर रहेगा कि इंश्योरेंस कंपनियों के टॉप-अप प्लान पर ध्यान दें। कई कंपनियां इस तरह के प्लान पेश करती हैं। यह आपके हेल्थ इंश्योरेंस कवर की लागत को कम करने का एक अच्छा जरिया हो सकता है।

No comments: