दो दिन बाद यानी 16 नवंबर को हर वर्ष की तरह प्रेस दिवस मनाने की रस्म अदायगी की जाएगी। हर वर्ष 16 नवंबर को यह रस्म अदायगी इसलिए की जाती है कि देश में प्रेस की स्वतंत्रता और उस पर नजर रखने के लिए गठित की गई प्रेस परिषद का इस दिन से गहरा रिश्ता है। प्रथम प्रेस आयोग की सिफारिश पर संसद में पारित प्रेस काउंसिल एक्ट 1965 के तहत स्थापित भारतीय प्रेस परिषद यानी प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने 16 नवंबर 1966 को काम करना शुरू किया था। प्रेस की स्वतंत्रता को बनाए रखने और उसके स्तर को और बेहतर बनाने के लिए निगरानी तंत्र के रूप में बनाई गई यह वैधानिक संस्था खुद आलोचनाओं से परे नहीं है। यह आरोप लगता रहा है कि प्रेस परिषद अपनी भूमिका को निभाने में पूरी तरह नाकाम रही है, लेकिन इससे सहानुभूति रखने वाले लोग यह भी कहते हैं कि इसको किसी तरह की दंडात्मक शक्ति नहीं दिए जाने के कारण यह अपनी प्रभावी भूमिका नहीं निभा पा रही है। हालांकि प्रेस परिषद को और प्रभावी बनाने के लिए न तो देश का मीडिया गंभीर है और न ही सरकार। प्रेस काउंसिल के गठन को एक लंबा अरसा बीत चुका है और समय की मांग है कि इसको आज के परिप्रेक्ष्य में आधुनिक बनाया जाए। अब जब देश में न्यूज चैनल भी अखबारों के बराबर आकर खड़े हो गए हैं तो प्रेस काउंसिल प्रमुख जस्टिस मार्कंडेय काट्जू की यह मांग भी अनुचित नहीं है कि समाचार चैनलों को भी प्रेस काउंसिल के दायरे में लाया जाए और प्रेस परिषद का नाम बदलकर मीडिया काउंसिल कर दिया जाए। हालांकि समाचार चैनल इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन समय के साथ प्रेस परिषद और और उसकी भूमिका को प्रभावी बनाने की जरूतर तो निस्संदेह है।
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ratan singh
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सभी देशवाशियों को नमस्कार। विचारों को मंच मिलना चाहिए क्योंकि इसके बिना समस्या का समाधान नही होता। याद रहे हर किसी के विचार महत्त्व रखते हैं...
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कहा जाता है कि हमारे देश में वित्तीय साक्षरता यानी वित्तीय योजनाओं की जानकारी काफी कम है। ज्यादातर भारतीय युवाओं खासकर कॉलेज में पढऩे वालों ...
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