Monday, June 15, 2009
गलत परंपराओं को फटे कपड़ों की तरह उतार फेंकें
पाकिस्तान की दो ही पहचान हैं, एक तो वह आतंकवाद का गढ़ है और दूसरा वहां हजारों साल पहले की सड़ी गली परंपराओं को आज भी ढोने की कोशिश की जा रही है। महिलाओं ने बुर्का नहीं पहना तो सजा, टीवी देखी तो सजा, कंडोम का इस्तेमाल किया तो सजा, परिवार नियोजन किया तो सजा। यह सजा कौन देता है, वहां की चुनी हुई सरकार नहीं, बल्कि वे कथित धार्मिक गुरु जो आज भी अपनी सत्ता को बनाए रखने के लिए लोगों को धर्म का डर दिखा रहे हैं। 60 साल पहले तक भारत का हिस्सा रहा पाकिस्तान आखिर हमारे मुकाबले इतना कैसे पिछड़ गया। बीमारी वही है, वहां स्वतंत्र चिंतन को नहीं पनपने दिया गया। पिछले साठ साल में पाकिस्तान आधे समय से ज्यादा समय तक फौजी शासन रहा। लोकतंत्र का उस रूप में विकास वहां हो नहीं नहीं पाया जिस रूप में भारत में हुआ। वहां लोगों को स्वतंत्र रूप से सोचने का मौका नहीं दिया गया और उन्हें धर्र्मांधता के जाल में फंसा दिया गया। आपको याद होगा कि पाकिस्तान की एक महिला मंत्री ने विदेश यात्रा के दौरान एक पुरुष के साथ स्काई डाइव करने पर पाकिस्तान में कितने विरोध का सामना करना पड़ा था। महिलाओं को वहां उपभोग की वस्तुएं समझा जाता है और महिलाओं के खिलाफ पंचायतों के फैसले बड़े ही डरावने होते हैं। भारत उससे कितना भिन्न है। दरअसर यहां स्वतंत्र मीडिया और चिंतन की समृद्ध परंपरा के कारण स्थितियां लगातार सुधरी हैं। हालांकि बुराइयों की जड़ों में मट्ठा डाला जाना अब भी बाकी है। भारत में भी आज भी प्रेमी-प्रेमिकाओं के खिलाफ फरमान, दलित उत्पीडऩ की होने वाली घटनाएं, दहेज के लिए लड़कियों को जलाना जैसी शर्मनाक घटनाएं होती हैं। लेकिन शिक्षित भारतीय समाज की बदलती सोच इस बात की ओर इशारा करती है कि 60 साल के इस सफर में 100 तक पहुंचते-पहुंचते भारत इन बराइयों के कवच को छोड़ चुका होगा। बस जरूरत है तो इस बात की कि जहां भी हमको गलत होता दिखे, उसे देखकर चुप न हों, बल्कि उस के खिलाफ माहौल बनाएं।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
ratan singh
-
सभी देशवाशियों को नमस्कार। विचारों को मंच मिलना चाहिए क्योंकि इसके बिना समस्या का समाधान नही होता। याद रहे हर किसी के विचार महत्त्व रखते हैं...
-
ratan singh
-
सरकार ने न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार कोशिश की है। यहां तक कि आम बजट में यह भी घोषणा की गई कि एनपीएस में नया ...
1 comment:
Not balanced write-up actually. Should re-consider.
You are utterly wrong on this part.
Many parts of Pakistan are more libral than the Indian Metropolis. Condition of women is more mature their. They don't have unsecure streets like we have in new delhi, our national capital.
It's the tribal areas you are talking about.
Gajendra Singh Bhati
U have miss-judged Pak.
Post a Comment