Friday, March 12, 2010
फायदेमंद है न्यू पेंशन स्कीम
पिछले महीने पेश किए गए आम बजट में सरकार ने न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) की ओर लोगों को लुभाने की कोशिश की है। वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने अपनी घोषणा में कहा कि नया एनपीएस अकाउंट खुलवाने पर सरकार तीन साल तक 1,000 रुपये सालाना का योगदान देगी यानी आपके एनपीएस खाते में सरकार तीन साल तक एक-एक हजार रुपये जमा करेगी। ऐसे में सभी के लिए यह समझना जरूरी हो जाता है कि एनपीएस अकाउंट क्या है, आम निवेशकों के लिए इसका क्या महत्व है और इसके क्या फायदे हैं।पीएफआरडीए की स्कीम सरकार ने साल 2003 में पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (पीआरएफडीए) का गठन किया था। पीआरएफडीए इस समय देश में पेंशन सुधारों और नियमन के लिए नियामक की भूमिका निभाता है। एक मई 2009 तक इसकी भूमिका राज्यों और केंद्र के कर्मचारियों द्वारा जमा पेंशन को रेगुलेट करने की थी। इसके बाद जनवरी 2004 के बाद नौकरी शुरू करने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार ने पेंशन का मार्केट लिंक्ड सिस्टम पेश करने की योजना बनाई। आम लोगों के लिए इस पेंशन स्कीम को 1 मई 2009 से खोल दिया गया।कैसे खोलें खाता एनपीएस अकाउंट स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एक्सिस बैंक, आईडीबीआई, सेंट्रल बैंक और यूनियन बैंक आदि में जाकर 18 से 55 साल का कोई भी व्यक्ति खुलवा सकता है। यह खाता खुलवाले के लिए शुरुआती शुल्क (इसमें पहले साल का वार्षिक रखरखाव शुल्क भी शामिल है ) 470 रुपये लगता है। दूसरे साल का एनुअल मैंटीनेंस चार्ज (एएमसी) 350 रुपये लिया जाता है। इस खाते में एक साल में कम से कम ४ सब्सक्रिप्शन करना और 6,000 रुपये डालना जरूरी है। हर ट्रांजेक्शन पर 10 रुपये शुल्क लिया जाएगा। रिकॉर्ड का रखरखाव करने वाली एजेंसी के लिए भी शुल्क वसूला जा सकता है जो अकाउंट बैलेंस का .0165 फीसदी हो सकता है। एनपीएस अकाउंट का रखरखाव सेंट्रल रिकॉर्ड कीपिंग एजेंसी एनएसडीएल कर रही है।उम्र के हिसाब से निवेशइस पेंशन स्कीम में निवेश के दो विकल्प होते हैं। या तो सेविंग्स को ऑटो मोड में रखा जा सकता है। इसके तहत निवेश को उम्र के मुताबिक लार्ज कैप इंडेक्स वाले स्टॉक्स में रखा जाता है। जैसे 35 साल की उम्र तक 50 फीसदी और आगे 55 की उम्र तक 10 फीसदी निवेश इसमें किया जाता है। या फिर नीचे दिए तीन फंड्स में से आप खुद चुन सकते हैं। विकल्प ई- एग्रेसिव फंड, जिसमें 50 फीसदी निवेश लार्ज कैप इंडेक्स के स्टॉक्स में किया जाए और 50 फीसदी बांड में लगाया जाए। विकल्प-सी इसमें मॉडरेट फंड होते हैं, जिसके तहत कॉरपोरेट और सरकारी बांड्स में निवेश किया जाता है। इसके अलाव तीसरा विकल्प-जी के तहत कंजरवेटिव फंड होते हैं जिनके तहत राज्यों और केंद्र सरकार के बांड्स में निवेश किया जाता है। इस स्कीम में आपकी उम्र 60 साल होने तक इनमें से किसी भी फंड में निवेश रहता है और इसके बाद अंतिम बैलेंस का 60 फीसदी आप निकाल सकते हैं और बाकी 40 फीसदी आपकी पेंशन के लिए चला जाता है।60 से पहले निकासी इसमें 60 साल की उम्र होने से पहले भी आप पैसा निकाल सकते हैं, लेकिन इस पर काफी कड़े प्रतिबंध हैं और बहुत जरूरी कारण होने पर ही पैसा निकालने की इजाजत दी जाती है। ऐसे में यदि 60 साल की उम्र होने से पहले ही इसमें से कुछ पैसा निकाल लिया जाता है तो 60 साल उम्र होने पर कुल जमा रकम में से आप केवल 20 फीसदी ही निकाल पाएंगे और बाकी 80 फीसदी रकम पेंशन के लिए चली जाएगी।आसान जमा, टैक्स छूट का फायदा भीएनपीएस में हर साल कम से कम 6,000 हजार रुपये जमा करने होंगे और नए बजट में की गई घोषणा के मुताबिक अगले वित्त वर्ष में नए अकाउंट खुलवाने वालों के खाते में पहले तीन साल तक हर साल 1,000 रुपये सरकार जमा करेगी। खाते में 12,000 रुपये के सालाना जमा पर 1,000 रुपये की टैक्स छूट भी 80सी के तहत हासिल की जा सकती है। यह छूट निवेश के समय ही मिल सकती है। इस निवेश पर हासिल होने वाले रिटर्न पर भी टैक्स छूट मिलती है, लेकिन अंतिम समय पैसे निकाले पर टैक्स लगेगा, क्योंकि तब इसे इनकम में गिना जाएगा। बजट में केंद्र सरकार ने इस न्यू पेंशन स्कीम को लोकप्रिय करने की कोशिश की है क्योंकि आम भारतीयों के पास सामाजिक सुरक्षा के नाम पर कुछ भी नहीं है। हालांकि सरकार की ओर से जमा रूपी सहयोग की यह घोषणा फिलहाल वित्त वर्ष 2010-11 के लिए ही की गई है।
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ratan singh
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सभी देशवाशियों को नमस्कार। विचारों को मंच मिलना चाहिए क्योंकि इसके बिना समस्या का समाधान नही होता। याद रहे हर किसी के विचार महत्त्व रखते हैं...
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ratan singh
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सरकार ने न्यू पेंशन स्कीम (एनपीएस) को प्रोत्साहित करने के लिए लगातार कोशिश की है। यहां तक कि आम बजट में यह भी घोषणा की गई कि एनपीएस में नया ...
1 comment:
मैंने हिसाब लगाकर देखा है कि किसी भी योजना में हमारा निवेषित धन उतना नहीं बढ पाता है जितनी मंहगाई बढ जाती है। मेचुरिटी धन से हम वो चीज या संपत्ति नहीं खरीद पाते हैं जिसे हम निवेश के मूल धन से खरीद सकते थे। फ़िर भी बचत करने की आदत और उस बचत का फ़लदायी योजनाओं में निवेश करना सुखी जीवन का प्रथम सोपान है।
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