Tuesday, March 23, 2010

बेची गई प्रॉपर्टी पर कैसे बचाएं टैक्स

सब जानते हैं कि प्रॉपर्टी बाजार काफी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। हर साल बड़ी संख्या में प्रॉपर्टी बिक्री संबंधी सौदे होते हैं। जो व्यक्ति प्रॉपर्टी बेचता है उसे काफी मोटी रकम हासिल होती है। ऐसे में कोई भी व्यक्ति यह जानने का इच्छुक जरूर होता है कि प्रॉपर्टी बेचने से हासिल रकम को वह कैसे टैक्स से बचा सकता है। साथ ही जिसने भी प्रॉपर्टी खरीदी है वह भी संभव है कभी इसे किसी दूसरे को बेचे, ऐसे में वह भी टैक्स बचत की बारीकियां सीखना चाहेगा। ऐसे में यह जानना जरूरी हो जाता है कि बेची गई प्रॉपर्टी पर लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स से कैसे बचा जा सकता है।लांग टर्म कैपिटल गेन ज्यादा महत्वपूर्णसबसे पहले तो यह स्पष्ट कर देना जरूरी है कि हम केवल लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स के बारे में बात कर रहे हैं। कैपिटल गेन उस प्रॉपर्टी की बिक्री पर लगता है जो आपके पास तीन साल से ज्यादा समय से थी। ऐसी प्रॉपर्टी जो आपके पास तीन साल से कम समय से थी उसकी बिक्री शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन के तहत आती है और उस पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है। इस तरह के शॉर्ट टर्म गेन को आपकी अन्य आय में गिना जाता है जिसके चलते इस पर लगने वाले टैक्स को आप आयकर की धारा 80 सी के तहत मिलने वाली छूट के तहत निवेश कर बचा सकते हैं। 80 सी के तहत पीपीएफ, ईएलएसएस, एनएससी आदि में निवेश किया जाता है।एनएचएआई या आरईसी के बांड्स में निवेशइसके अलावा लांग टर्म कैपिटल गेन पर टैक्स आप दो तरीकों से बचा सकते हैं। टैक्स बचाने का पहला रास्ता है प्रॉपर्टी बेचने से प्राप्त पूंजी को छह महीनों के भीतर एनएचएआई या आरईसी के बांड्स में निवेश किया जाए। यह टैक्स बचाने का सबसे सरल रास्ता है। इसमें परेशानी केवल यह है कि निवेश के लिए दिए गए समय में आपके लिए बांड्स उपलब्ध हो पाएं। दूसरी बात यह है कि इस निवेश पर एक वित्त वर्ष में केवल 50 लाख रुपये की निवेश लिमिट है। ऐसे में यदि आपने प्रॉपर्टी बेचकर इससे भी ज्यादा रकम हासिल की है तो यह रास्ता आपके के लिए ज्यादा फायदेमंद नहीं हो सकता। हां, यह हो सकता है कि आप प्रॉपर्टी बेचने का समय ऐसा चुनें जब छह महीनों के भीतर वित्त वर्ष बदल जाए। ऐसे में आप निवेश की लिमिट को एक करोड़ रुपये तक ले जाए पाएंगे। उदाहरण के लिए यदि कोई प्रॉपर्टी जनवरी में बेची जाती है तो उसके लिए निवेश की छह महीनों की समय सीमा जून में समाप्त होगी। जून अगले वित्त वर्ष में पड़ेगा, ऐसे में आप छह महीनों के भीतर ही एक करोड़ रुपये का निवेश इन बांड्स में कर सकेंगे।दूसरी प्रॉपर्टी में निवेश से बचतलांग टर्म प्रॉपर्टी गेन टैक्स से बचने का दूसरा तरीका है प्राप्त पूंजी को किसी दूसरी प्रॉपर्टी में निवेश करना। इस तरीके से टैक्स छूट हासिल करने के लिए कई शर्तें हैं। इनमें पहली है जो पॉपर्टी बेची गई है वह रेजिडेंशियल होनी चाहिए, कॉमर्शियल नहीं। कॉमर्शियल प्रॉपर्टी की स्थिति में आपको सेक्शन 54एफ का सहारा लेना पड़ेगा। इसके मुताबिक आपको बिक्री से प्राप्त शुद्ध प्राप्ति को निवेश करना होगा न कि केवल कैपिटल गेन अमाउंट। हां यहां रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी का मतलब यह नहीं है कि वह आपकी खुद की हो। रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी किराए पर ली गई भी हो सकती है। दूसरी शर्त के मुताबिक यह छूट व्यक्ति विशेष और हिंदू अधिनियम के तहत अविभाजित परिवार को ही मिल सकती है। ऐसे में यदि कोई कंपनी या हिस्सेदार फर्म प्रॉपर्टी बेचती है तो उसे यह छूट नहीं मिलेगी। करदाता को तैयार रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी या अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी या तो एक साल पहले या बिक्री से दो साल बाद तक खरीदनी होगी। अंडर कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी बिक्री के तीन साल बाद तक खरीदी जा सकती है। कंस्ट्रक्शन की शुरुआत को लेकर इसमें कोई प्रतिबंध नहीं है। इसके अलावा यह भी जरूरी नहीं है कि कैपिटल गेन अमाउंट और नए घर की कीमत के बीच कोई संबंध हो। उदाहरण के लिए करदाता प्रॉपर्टी बेचने से हासिल रकम को निवेश करने के बाद बाकी रकम के लिए लोन भी ले सकता है। यदि लोन की वैल्यू कैपिटल गेन के बराबर है तो टैक्स छूट मिल सकती है। यदि लोन वैल्यू कैपिटल गेन से कम है तो भी छूट लोन वैल्यू की हद तक मिल सकती है।तीन साल नहीं बेच सकते नई प्रॉपर्टीनए घर की बिक्री पर तीन साल का लॉक इन है। ऐसे में यदि तीन साल से पहले घर को बेचा गया तो पहले दी गई टैैक्स छूट वापस ले ली जाएगी। ऐसे में कैपिटल गेन टैक्स से बचने के लिए नई प्रॉपर्टी में निवेश के लिए दो से तीन साल का समय मिल जाता है। ऐसे में एक परेशानी है। किसी भी वित्त वर्ष में टैक्स रिटर्न की आखिरी तारीख 31 जुलाई है। ऐसे में यदि डील टैक्स रिटर्न की आखिरी तारीख से पहले नहीं हुई तो क्या होगा। ऐसे में करदाता को नए मकान के लिए रखी रकम को एक स्पेशल डिपॉजिट में रखना होता है जिसे कैपिटल गेन्स डिपॉजिट अकाउंट स्कीम (सी-डिपॉजिट) कहा जाता है। आमतौर पर यह सुविधा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक देते हैं।

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 ratan singh