Monday, March 29, 2010

मक्का की प्रोसेसिंग से कमाएं मुनाफा

भारत में जिन खाद्य फसलों का उत्पादन किया जाता हैं, उनमें गेहूं और चावल के बाद मक्का का स्थान तीसरे नंबर पर आता है। पर इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के बावजूद भी इसके प्रसंस्करण और उससे बनने वाले उत्पादों के बारे में कम ही लोगों को जानकारी है। खास बात तो यह है कि देश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री स्टार्च के लिए मुख्य तौर पर मक्का पर ही निर्भर है। इस तरह मक्का की प्रोसेसिंग कर स्टार्च, कॉर्न फ्लोर, कॉर्न ऑयल, कॉर्न फ्लैक्स, पशुहार, बेबी कार्न आदि उत्पाद बनाए जा सकते हैं।देश में आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र मक्का के प्रमुख उत्पादक राज्य हैं। वहीं, अन्य प्रदेशों की तुलना में मध्यप्रदेश मक्का उत्पादन में चौथे नंबर पर आता है। इसके अलावा पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, तमिलनाडु, बिहार, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पश्चिम बंगाल, मेघालय, मनीपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा आदि राज्यों में भी इसकी खेती बड़े पैमाने पर होती है। मौजूदा समय में मक्का का लगभग 55 प्रतिशत उपयोग भोजन, 14 प्रतिशत पशुहार, 18 प्रतिशत मुर्गीदाना, 12 प्रतिशत स्टार्च और करीब डेढ़ प्रतिशत का उपयोग बीज के रूप में किया जाता है। इसके दाने में करीब 30 प्रतिशत तेल, 18 प्रतिशत प्रोटीन और बड़ी मात्रा में स्टार्च पाया जाता है। मक्का की प्रोसेसिंग कर जहां इसके विभिन्न प्रकार के स्नैक्स बनाए जा सकते हैं, वही अच्छी मात्रा में प्रोटीन होने के कारण इसके बिस्किट सहित अन्य बेकिंग उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं। इसके अलावा रेडी टू ईट प्रोडक्ट के रूप में भी मक्का के विभिन्न उत्पाद इन दिनों प्रचलन में हैं। साथ ही कॉर्न फ्लैक्स और बेबी कॉर्न मक्का के खाद्य उत्पादों में लोकप्रिय हो रहे हैं। इस क्षेत्र में कई बड़ी कंपनियों के ब्रांड भी बाजार में आसानी से दिखाई दे सकते हैं। इन सबके अलावा मक्का का स्टार्च द्रव्य अथवा पावडर रूप में बड़ी खपत वाला उत्पाद है। इस समय टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज में मक्का के स्टार्च की बड़ी डिमांड हैं। टेक्सटाइल के अलावा अनेक खाद्य पदार्थो भी मक्का का स्टार्च इस्तेमाल किया जाता है। इसी तरह प्रोसेसिंग कर इसका तेल भी बनाया जा सकता है, जो कि विभिन्न दवाओं के साथ मालिश आदि में प्रयुक्त होता है। साथ ही मक्का लिक्विड शुगर के तौर सोरविटॉल, ग्लूकोज सहित कई अन्य उत्पाद भी बनाए जा सकते हैं। केन्द्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान भोपाल के वरिष्ठ वरिष्ठ वैज्ञानिक (खाद्य प्रसंस्करण) डा. एसपी सिंह बताते हैं कि लघु एवं कुटीर उद्योग के रूप में मक्का प्रसंस्करण की इकाई लगाने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। इसमें स्टार्च पावडर, कॉर्न फ्लेक्स, कॉर्न फ्लोर की छोटी इकाई लगाने के लिए अलग-अलग रूप से करीब पांच लाख रुपये निवेश की जरूरत होती है। ऑटोमेटिक संयंत्र लगाने के लिए लगभग 20 लाख रुपये तक खर्चा आता है। इसके लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं के तहत सब्सिडी पर वित्त का प्रबंध किया जा सकता है। मक्का प्रसंस्करण में करीब 200 मीट्रिक टन प्रति दिन क्षमता की स्टार्च उत्पादन क्षमता वाली इकाई की स्थापना में लगभग 30 करोड़ रुपये निवेश की जरूरत होती है। इस इकाई में मक्का के ग्लूकोज, जर्मस, फाइबर, ग्लूटेन आदि का उत्पादन भी किया जा सकता है।

2 comments:

Unknown said...

डॉ,ऐसपिसिह साहब का कॉन्टेकेट नम्बर बताने की कर्पा करे

Ranjit said...

Dear sir,
Please provide contact number of related person for processing unit in gonda district.
Thanks and regards
Ranjit jaiswal
8573866373

 ratan singh